छत्तीसगढ़: महासमुंद में डेक्कन गोल्ड माइन्स को मिले 40 लाख टन से अधिक खनिज के संकेत
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में डेक्कन गोल्ड माइन्स को भालूकोना क्रिटिकल मिनरल प्रोजेक्ट के दौरान 40 लाख टन से अधिक खनिजीकरण की संभावना का पता चला है.
रायपुर । संवाददाता: डेक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड (DGML) ने सोमवार को जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित उसके भालूकोना क्रिटिकल मिनरल प्रोजेक्ट में प्रारंभिक अन्वेषण के दौरान 40 लाख टन से अधिक खनिजीकरण की संभावना का संकेत मिला है. गोल्ड और क्रिटिकल मिनरल्स रिसोर्स के क्षेत्र में काम करने वाली इस कंपनी को पिछले साल 1 अप्रैल को जिले की बसना तहसील में भालूकोना-जामनिडीह ब्लॉक के 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए कम्पोजिट लाइसेंस (CL) प्राप्त हुआ था.
यह लाइसेंस कंपनी को निकल, कॉपर और प्लेटिनम ग्रुप एलिमेंट्स (PGE) की खोज करने और बाद में उनका खनन करने की अनुमति देता है.
कंपनी द्वारा सोमवार को जारी बयान के अनुसार, अन्वेषण ड्रिलिंग डेटा के प्रारंभिक भूवैज्ञानिक मॉडलिंग से लगभग 0.24 प्रतिशत निकेल समकक्ष ग्रेडिंग वाले 40 लाख टन से अधिक खनिजीकरण की क्षमता का पता चला है.
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रारंभिक अनुमान भालूकोना में पहचाने गए 1.3 किलोमीटर लंबे खनिजीकरण गलियारे के लगभग 300 से 350 मीटर के हिस्से में केवल सतह के पास मौजूद खनिजीकरण को ही कवर करता है.
इन निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए डेक्कन गोल्ड के प्रबंध निदेशक हनुमा प्रसाद मोदाली ने कहा कि यह प्रारंभिक अनुमान महत्वपूर्ण खनिजों के लिए भारत की घरेलू क्षमता तलाशने के प्रयासों में एक उत्साहजनक पड़ाव है.
उन्होंने बताया कि कंपनी का ध्यान विज्ञान-आधारित अन्वेषण, तकनीकी सटीकता और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के माध्यम से भालूकोना प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर है, जिससे एक मजबूत घरेलू खनन पारिस्थितिकी तंत्र और अधिक लचीली क्रिटिकल-मिनरल सप्लाई चेन के निर्माण में योगदान दिया जा सके.
हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े केवल प्रारंभिक अन्वेषण स्तर के अनुमान हैं और यह किसी पुष्टि किए गए खनिज संसाधन या भंडार का रूप नहीं लेते हैं. जमा खनिजों के पैमाने और आर्थिक व्यवहार्यता को स्थापित करने के लिए आगे अन्वेषण और तकनीकी मूल्यांकन की आवश्यकता होगी.