भिलाई में 15 हजार की नौकरी से दुबई में आलीशान साम्राज्य, जानिए आरोपी सौरभ चंद्राकर की पूरी कहानी
भिलाई के जूस सेंटर से दुबई के आलीशान जीवन और फिर ओमान से भारत प्रत्यर्पण—जानिए महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप घोटाले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर की पूरी कहानी.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला सौरभ चंद्राकर, जो कभी एक जूस की दुकान पर काम करके महीने के महज 15,000 रुपये कमाता था, अचानक दुबई के आलीशान विला, चार्टर्ड विमानों की सवारी और 200 करोड़ रुपये की शाही शादी के कारण सुर्खियों में आ गया. लेकिन इस तड़क-भड़क भरे जीवन के पीछे छुपा था महादेव ऑनलाइन बुक ऐप का कथित अंतरराष्ट्रीय अवैध सट्टेबाजी और मनी-लॉन्ड्रिंग का विशाल नेटवर्क.
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुकदमों का सामना कर रहे सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के बाद ओमान से हिरासत में लेकर रविवार को भारत लाया गया है. 16 फरवरी 2022 को भारत छोड़ने वाले चंद्राकर को रायपुर में विशेष सीबीआई अदालत में पेश किए जाने की संभावना है.
भिलाई की साधारण शुरुआत और महादेव ऐप का गठन
सौरभ चंद्राकर का बचपन भिलाई के एक साधारण परिवार में बीता, जहां उनके पिता भिलाई नगर निगम में कार्यरत थे और मां गृहणी थीं. वर्ष 2014-15 के दौरान उन्होंने कपड़ों की दुकानों पर काम करना शुरू किया और बाद में नेहरू नगर स्थित 'जूस फैक्ट्री' नाम की दुकान से जुड़े.
यहीं उनकी पहचान सट्टेबाजी गतिविधियों से जुड़े भिलाई निवासी रवि उप्पल से हुई. दोनों ने मिलकर कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के बढ़ते क्रेज का फायदा उठाया. दुबई को मुख्य केंद्र बनाकर उन्होंने महादेव ऑनलाइन बुक की शुरुआत की, जिसने क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और कार्ड गेम्स पर अवैध सट्टेबाजी को बढ़ावा दिया.
दुबई से नेटवर्क का संचालन और 200 करोड़ की शादी
ईडी और सीबीआई की जांच के अनुसार, यह नेटवर्क भारत भर में फैले हजारों फ्रेंचाइजी पैनल, एजेंटों और बिचौलियों के माध्यम से व्हाट्सएप तथा टेलीग्राम का उपयोग कर चलाया जाता था. इस सट्टेबाजी नेटवर्क का संबंध रेडी अन्ना, फेयरप्ले, स्काईएक्सचेंज और लोटस365 जैसे अन्य सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से भी पाया गया.
फर्जी दस्तावेजों वाले बैंक खातों और हवाला चैनलों के जरिए करोड़ों रुपये विदेश भेजे गए. फरवरी 2023 में संयुक्त अरब अमीरात के रास अल-खैमाह में हुई सौरभ की शादी ने जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें ईडी के अनुसार लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे.
इसमें मेहमानों व कलाकारों के लिए चार्टर्ड प्लेन, इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को 112 करोड़ रुपये का भुगतान और 42 करोड़ रुपये के होटल बुकिंग शामिल थे.
विदेश में संपत्ति, राजनीतिक विवाद और ओमान से प्रत्यर्पण
सौरभ चंद्राकर ने भारतीय पासपोर्ट के होते हुए भी मई 2022 में प्रशांत महासागरीय देश वानुअतु की नागरिकता और पासपोर्ट हासिल कर लिया था. मार्च 2026 में ईडी ने दुबई की 18 और नई दिल्ली की 2 संपत्तियों सहित लगभग 1,700 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अनंतिम रूप से जब्त किया.
इस मामले ने छत्तीसगढ़ में तब राजनीतिक तूल पकड़ा जब ईडी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े 508 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा सामने आया, जिसे बघेल ने राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया.
बाद में राज्य में भाजपा सरकार बनने पर मार्च 2024 में प्राथमिकी दर्ज की गई और मामला सीबीआई को सौंप दिया गया. अंततः ओमान सरकार और भारतीय एजेंसियों के समन्वय से सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण संभव हो सका, जिससे अब पूछताछ के जरिए कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है.