छत्तीसगढ़: प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग 2 साल में 163 से बढ़कर 665 हुए
रायपुर । संवादाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसमें राज्य के भीतर प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया गया है. नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया कि प्रदेश में अब 665 औद्योगिक इकाइयां खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न कर रही हैं.
सदन में चिंता का विषय यह रहा कि महज एक साल के भीतर यह आंकड़ा 163 से बढ़कर 665 तक पहुंच गया है, जो राज्य के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है. नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने आंकड़ों में आए इस तीव्र उछाल पर सरकार को घेरते हुए पूछा कि फरवरी 2024 तक जो संख्या बेहद कम थी, वह अचानक इतनी कैसे बढ़ गई और इसके पीछे की निगरानी प्रक्रिया में क्या खामियां रही हैं.
पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने इन आंकड़ों की पुष्टि करते हुए बताया कि सरकार अब उत्सर्जन की निगरानी के लिए सख्त कदम उठा रही है. उन्होंने स्वीकार किया कि कई उद्योगों द्वारा बिजली बचाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (ESP) को बंद करने की शिकायतें मिलती हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है.
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अब तक 19 उद्योगों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग और 124 इकाइयों में IoT-आधारित तकनीक का विस्तार किया गया है.
हालांकि, विपक्ष ने इसे नाकाफी बताते हुए रायगढ़, कोरबा और रायपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए 'हेल्थ इम्पैक्ट असेसमेंट' कराने की मांग की है.
सरकार ने स्पष्ट किया कि उद्योगों को अपने खर्च पर निगरानी उपकरण लगाने होंगे और कोरबा में शुरू की गई नई 50 एकड़ की वैज्ञानिक लैंडफिल साइट के जरिए सालाना 60,000 मीट्रिक टन कचरे का प्रबंधन किया जाएगा, लेकिन बढ़ते प्रदूषण के इन आंकड़ों ने औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच की खाई को गहरा कर दिया है.