नन गिरफ्तारी: अमित शाह को श्रेय देने पर आर्कबिशप नाराज़
नन गिरफ्तारी: एक बिशप ने दूसरे आर्कबिशप का खंडन किया
त्रिशूर । डेस्क: इरिंजलाकुडा डायोसिस ने छत्तीसगढ़ में ननों की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकारों की कड़ी निंदा की है. रविवार को डायोसिस के चर्चों में पढ़े गए एक पत्र में कहा गया कि संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शनों के बावजूद केंद्र सरकार ने इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया.
पत्र में उल्लेख किया गया कि ननों को जमानत तो मिली, लेकिन वे अब भी कानूनी पेचीदगियों में उलझी हैं, और न तो केंद्र और न ही छत्तीसगढ़ सरकार ने उनकी पूर्ण रिहाई के लिये कोई कदम उठाया है.
इरिंजलाकुडा डायोसिस के बिशप मार पॉली कन्नूकदन ने स्पष्ट किया कि कैथोलिक चर्च का एक निश्चित राजनीतिक दृष्टिकोण है, लेकिन यह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं है. रविवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "चर्च की आधिकारिक स्थिति केवल इसके नेतृत्व द्वारा व्यक्त की जाती है. व्यक्तियों के निजी विचारों को चर्च की राय के रूप में गलत नहीं समझना चाहये."
यह बयान थालास्सेरी आर्कबिशप मार जोसेफ पम्पलानी के उस दावे के जवाब में था, जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार ननों को जमानत मिलने का श्रेय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार को दिया था.
आर्कबिशप पम्पलानी ने कहा था कि केंद्र सरकार और अमित शाह के हस्तक्षेप से ननों को जमानत मिली, जिसके लिये उन्होंने आभार व्यक्त किया. उन्होंने यह भी कहा कि देर से ही सही, न्याय हुआ. साथ ही, उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की आलोचना करते हुये कहा कि राज्य के रुख के बावजूद केंद्र ने जमानत की प्रक्रिया को संभव बनाया.
बिशप कन्नूकदन ने इस "अन्यायपूर्ण और आधारहीन" गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध जारी रखने की डायोसिस की प्रतिबद्धता दोहराया है.
उन्होंने कहा, "जमानत मिलना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इसमें कठोर शर्तें शामिल हैं. चार्जशीट को रद्द करना और मामला पूरी तरह वापस लेना आवश्यक है."
उन्होंने ट्रेन टीटीई और बजरंग दल जैसे संगठनों के उन सदस्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की, जो कथित तौर पर इस घटना में शामिल थे.
इसी क्रम में, रविवार शाम को चालाकुडी में एक विशाल विरोध रैली का आयोजन किया गया.