विधानसभा: 12वीं बोर्ड हिंदी पेपर लीक पर हंगामा के बाद जांच के आदेश
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को कक्षा 12वीं के हिंदी विषय के प्रश्नपत्र लीक होने के कथित मामले ने राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी. सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस, आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर चला. कांग्रेस ने राज्य की स्कूल शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की, जिसके बाद सरकार ने आधिकारिक तौर पर जांच के आदेश जारी कर दिए हैं.
सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कुछ हिस्सों का वायरल होना बेहद गंभीर है और इसने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर जनता के भरोसे को हिला दिया है.
विधायक ने मांग की कि सरकार को तुरंत इस मामले में एफआईआर दर्ज कर पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके. उनका तर्क था कि यदि प्रश्नपत्र वाकई पहले ही बाहर आ गया था, तो इससे कुछ छात्रों को अनुचित लाभ मिला होगा, जो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता पर सवालिया निशान लगाता है.
दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने पेपर लीक के दावों को सिरे से खारिज कर दिया. विधानसभा में जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में कहीं भी पेपर लीक की पुष्टि नहीं हुई है. मंत्री के अनुसार, एक छात्र संगठन ने परीक्षा की पूर्व संध्या पर व्हाट्सएप ग्रुपों में कुछ प्रश्न प्रसारित किए थे, जिससे भ्रम और अटकलों की स्थिति पैदा हुई.
हालांकि, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल को मामले की सूक्ष्मता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि यदि जांच में कोई भी अनियमितता पाई गई, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी.
सूत्रों के अनुसार, 14 मार्च को आयोजित हुई हिंदी की परीक्षा से कुछ घंटे पहले, यानी 13 मार्च की देर रात कुछ प्रश्न सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर वायरल होने लगे थे. जैसे ही वास्तविक परीक्षा के कुछ सवाल इन वायरल संदेशों से मिलते-जुलते दिखे, छात्रों और अभिभावकों के बीच हड़कंप मच गया.
इस घटनाक्रम के विरोध में सोमवार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के सदस्यों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल के कार्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की.
मामले की गंभीरता को देखते हुए बोर्ड ने पुलिस और साइबर सेल में प्राथमिकी दर्ज कराई है.
प्रदेश के जनसंपर्क विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से जानकारी दी कि वायरल प्रश्नों के स्रोत और उनकी सत्यता का पता लगाने के लिए डिजिटल ट्रेल की जांच की जा रही है.
इस बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन के पारदर्शिता के दावे खोखले साबित हो रहे हैं. फिलहाल, साइबर विशेषज्ञ और पुलिस की टीमें इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि इन संदेशों की शुरुआत कहां से हुई थी.