गरीबों को विधिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए: CJ रमेश सिन्हा
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार 16 सितंबर बिलासपुर में विधिक सहायता रक्षा परामर्शदाताओं (लीगल एड डिफेंस काउंसल) के लिए एक रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का उद्घाटन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक-प्रमुख, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने किया.
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष, तथा न्यायमूर्ति रजनी दुबे, उच्च न्यायालय की न्यायाधीश और छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के कार्यकरण की निगरानी समिति की अध्यक्ष, भी उपस्थित थीं.
अपने उद्घाटन संबोधन में, मुख्य न्यायाधीश ने विधिक सहायता रक्षा परामर्शदाताओं की समाज के हाशिए पर मौजूद और कमजोर वर्गों के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला.
उन्होंने जोर देकर कहा, "गरीबों को विधिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए, लेकिन विधिक सहायता स्वयं गरीब नहीं होनी चाहिए." उन्होंने रक्षा परामर्शदाताओं को अपने ज्ञान, कौशल और पेशेवर नैतिकता को निरंतर उन्नत करने की आवश्यकता पर बल दिया.
मुख्य न्यायाधीश ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि विधिक सहायता का ढांचा संविधान द्वारा प्रदत्त कानून के समक्ष समानता और कानूनों की समान सुरक्षा की गारंटी का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है.
उन्होंने कहा, "आपके अथक प्रयासों के माध्यम से ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39ए का आदर्श - कि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण किसी को भी न्याय से वंचित नहीं किया जाएगा - हमारे न्यायालयों में प्रतिदिन साकार हो रहा है."
उन्होंने यह भी बताया कि 1 सितंबर 2025 तक, छत्तीसगढ़ में 23 मुख्य विधिक सहायता रक्षा परामर्शदाता और 54 उप-मुख्य विधिक सहायता रक्षा परामर्शदाता इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभा रहे हैं. यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह समर्पित पेशेवरों के एक नेटवर्क को दर्शाता है, जिनकी सेवा से हमारे न्याय तंत्र की विश्वसनीयता और पहुंच में वृद्धि हो रही है.
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जनवरी 2025 से अगस्त 2025 के बीच, छत्तीसगढ़ में रक्षा परामर्शदाताओं को 3,443 मामले सौंपे गए, जिनमें से 1,938 मामले - जिसमें सत्र न्यायालयों और मजिस्ट्रेट न्यायालयों के मामले शामिल हैं - सफलतापूर्वक निपटाए गए.
इस अवधि में 2,101 जमानत आवेदनों में से 2,027 जमानत आवेदनों पर परामर्शदाताओं ने मेहनत से काम किया. प्रत्येक मामला केवल एक सांख्यिकीय परिणाम नहीं, बल्कि उन व्यक्तियों और परिवारों की वास्तविक जिंदगी को दर्शाता है, जिनका न्याय में विश्वास समर्पित हस्तक्षेप के माध्यम से मजबूत हुआ है.
मुख्य न्यायाधीश ने सभी विधिक सहायता रक्षा परामर्शदाताओं से आग्रह किया कि "कानून में सीखने की यात्रा अंतहीन है, क्योंकि कानून स्वयं निरंतर विकसित हो रहा है. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर, आप बदलते समय के साथ तालमेल बिठाने, कानून के समर्पित छात्र बने रहने और न्याय की इस महान सेवा के प्रति स्वयं को नया करने का संकल्प दोहरा रहे हैं."
इस रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूरे राज्य से रक्षा परामर्शदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इंटरैक्टिव सत्रों व विचार-विमर्श में शामिल हुए. यह कार्यक्रम जरूरतमंद लोगों को मुफ्त और प्रभावी विधिक सेवाएं प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा.
कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के प्रभारी रजिस्ट्रार जनरल और अन्य रजिस्ट्री अधिकारी भी उपस्थित थे.
स्वागत भाषण छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक द्वारा दिया गया, और कार्यक्रम का समापन छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ.