छत्तीसगढ़: 20% कम बारिश से खरीफ फसलों पर संकट
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में मानसून के अनियमित मिजाज ने किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. चालू मानसून सत्र के दौरान 1 जून से 26 जुलाई तक राज्य में सामान्य से 20 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 507.2 मिमी सामान्य बारिश के मुकाबले केवल 404.5 मिमी पानी बरसा है. राज्य में बारिश का यह असमान वितरण फसलों की सेहत और जल निकायों की स्थिति को सीधे प्रभावित कर रहा है.
क्षेत्रीय आंकड़ों पर नजर डालें तो सारंगढ़-बिलाइगढ़ जिला सबसे अधिक बारिश पाने वाला क्षेत्र बना है, जहां सामान्य से 61% अधिक (657.9 मिमी) वर्षा हुई है. इसके अलावा जांजगीर (29% अधिक), बलौदाबाजार (21% अधिक) और मुंगेली (20% अधिक) में भी बेहतर स्थिति है.
राजधानी रायपुर में 469.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 7% अधिक है और सामान्य श्रेणी में आती है. बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी, कोरबा और रायगढ़ सहित मध्य छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिले फिलहाल सामान्य श्रेणी में बने हुए हैं.
इसके विपरीत, राज्य के एक बड़े हिस्से में सूखा जैसी स्थिति बनती दिख रही है. सरगुजा जिला 50% बारिश की कमी के साथ सबसे अधिक प्रभावित है. इसके अलावा कांकेर (48% कमी), जशपुर (46% कमी), बेमेतरा (43% कमी), बस्तर (41% कमी), कोंडागांव (40% कमी) और सुकमा (40% कमी) जैसे जिलों में गंभीर जल संकट खड़ा हो गया है. बीजापुर, कबीरधाम और सूरजपुर जैसे अन्य जिलों में भी बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है.
बीते 24 घंटों के दौरान महासमुंद के बसना में सर्वाधिक 154 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सरायपाली और सोनाखान में भी अच्छी बौछारें पड़ीं. हालांकि, राज्य के बाकी हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क या हल्की बारिश तक ही सीमित रहा.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ हफ्तों में मानसून की सक्रियता ही यह तय करेगी कि राज्य में खरीफ फसलों का उत्पादन और जल भराव की स्थिति कैसी रहेगी.