कबीरधाम: 375 मर्ज स्कूलों को नहीं मिला अनुदान, शिक्षकों ने उठाई मांग
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया अब जमीनी स्तर पर बड़ी चुनौती बनती जा रही है. कबीरधाम जिले में इस नीति के तहत मर्ज किए गए 375 स्कूलों के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो गया है. स्थिति यह है कि विलय के काफी समय बाद भी इन स्कूलों को अब तक शाला अनुदान (स्कूल ग्रांट) की राशि आवंटित नहीं की गई है, जिससे दैनिक शैक्षणिक गतिविधियों और बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव में भारी दिक्कतें आ रही हैं.
इस गंभीर विषय को लेकर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है.
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी के अनुसार, प्रशासन ने दो या तीन स्कूलों को मिलाकर एक इकाई तो बना दिया, लेकिन बजट का आवंटन केवल मुख्य 'यू-डाइस' वाले विद्यालय को ही किया जा रहा है. ऐसे में मुख्य विद्यालय के पास उपलब्ध सीमित राशि से वह केवल अपनी पूर्व निर्धारित व्यवस्थाएं ही संभाल पा रहा है, जबकि साथ में जोड़ी गई अन्य शालाओं के लिए फंड की कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं है.
टीचर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि अनुदान न मिलने के कारण न केवल स्कूलों का सामान्य कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि ईको क्लब, कम्युनिटी मोबिलाइजेशन और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) जैसे महत्वपूर्ण मदों में भी राशि का अभाव है.
गौरतलब है कि प्रदेश स्तर पर अब तक कुल 10,538 स्कूलों का विलय किया जा चुका है.
संगठन का आरोप है कि नियमानुसार छात्र संख्या के आधार पर बजट बढ़ाया जाना था, लेकिन इसके विपरीत कई स्थानों पर पुरानी जारी राशि को भी वापस ले लिया गया है. शिक्षकों ने मांग की है कि प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्तर की मर्ज की गई प्रत्येक इकाई के लिए पृथक अनुदान राशि तत्काल जारी की जाए, ताकि शिक्षण व्यवस्था पटरी पर लौट सके.