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हायर एजुकेशन के लिए स्टडी लीव अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

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09 मार्च 2026, 01:58 PM 2 मिनट में पढ़ें 3

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी उच्च शिक्षा के लिए 'स्टडी लीव' को अपने मौलिक या कानूनी अधिकार के तौर पर दावा नहीं कर सकते. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्त गुरु की डिवीजन बेंच ने एक शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में कार्यरत गणित के लेक्चरर की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के पुराने आदेश को बरकरार रखा है. 


इस मामले में याचिकाकर्ता ने पीएचडी करने के लिए अध्ययन अवकाश की अनुमति मांगी थी, जिसे विभाग और बाद में अदालत ने भी नामंजूर कर दिया.

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अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई सरकारी कर्मचारी स्टडी लीव पर जाता है, तो उस अवधि के दौरान उसे सार्वजनिक धन से वेतन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं. ऐसे में यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि कर्मचारी द्वारा प्राप्त की गई उच्च शिक्षा का लाभ अंततः उस संस्थान और आम जनता को मिले जहां वह कार्यरत है. 


हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन का निवेश केवल तभी उचित है जब वह संस्थागत बेहतरी में योगदान दे.


पूरा मामला तब शुरू हुआ जब लेक्चरर ने पीएचडी के लिए कॉलेज प्रिंसिपल के माध्यम से आवेदन किया था, जिसे कौशल विकास विभाग को भेजा गया. 


हालांकि, जब उन्होंने रायपुर के एक पीजी कॉलेज में प्रवेश ले लिया और अवकाश के लिए आवेदन किया, तो उसे नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया. 


हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य की नीति के अनुसार उच्च शिक्षा के लिए 'राष्ट्रीय महत्व के संस्थान' में प्रवेश लेना अनिवार्य पात्रता थी, जिसे याचिकाकर्ता साबित करने में विफल रहे. कोर्ट ने दोहराया कि अध्ययन अवकाश देना पूरी तरह से नियोक्ता के विवेक और संस्था की आवश्यकता पर निर्भर करता है, इसे किसी भी स्थिति में अनिवार्य अधिकार नहीं माना जा सकता.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP