रेलवे अधिकारी को झटका: मनपसंद डिफेंस असिस्टेंट की मांग हाईकोर्ट से खारिज
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के एक सहायक विद्युत अभियंता की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी विभागीय जांच के लिए मनपसंद 'डिफेंस असिस्टेंट' की मांग की थी. न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल और न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि एक दशक से लंबित जांच को आगे बढ़ाने के बजाय यह याचिका कार्यवाही में देरी करने का एक प्रयास प्रतीत होती है.
अदालत ने स्पष्ट किया कि न्याय की प्रक्रिया को बाधित करने के लिए देरी करने वाली रणनीतियों की अनुमति नहीं दी जा सकती.
यह मामला अगस्त 2015 का है, जब सीबीआई ने उक्त अधिकारी को कथित रिश्वतखोरी के मामले में रंगे हाथों गिरफ्तार किया था. इसके बाद रेलवे प्रशासन ने 2016 में उनके खिलाफ बड़ी पेनल्टी की कार्यवाही शुरू की थी.
जांच के दौरान याचिकाकर्ता ने एक विशिष्ट सेवानिवृत्त कर्मचारी को अपना बचाव सहायक नियुक्त करने की जिद की थी, जिसे रेलवे बोर्ड के नियमों के तहत नामंजूर कर दिया गया था.
इससे पहले केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) भी उनकी अपीलों को खारिज कर चुका था.
हाईकोर्ट ने 'रेस ज्यूडिकाटा' (पूर्व न्याय) के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि एक ही मुद्दे पर बार-बार याचिका लगाकर मुकदमेबाजी को अंतहीन नहीं बनाया जा सकता. अदालत के इस फैसले से अब पिछले 10 वर्षों से अटकी इस विभागीय जांच के पूरा होने का रास्ता साफ हो गया है.