HC: कर्मचारी को सबसे निचले पद पर डिमोट नहीं किया जा सकता
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह व्यवस्था दी है कि किसी कर्मचारी को दंड के रूप में उसकी प्रोन्नति (promotion) से ठीक पहले वाले पद (immediate lower post) पर ही अवनत (revert) किया जा सकता है, न कि सेवा के सबसे निचले पद पर. कोर्ट ने इस प्रकार की कार्रवाई को 'कानूनन अनुचित और अमान्य' (unsustainable and bad in law) बताया है.
याचिकाकर्ता को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में टेक्नीशियन ग्रेड-III के पद पर नियुक्त किया गया था और वह प्रगति करते हुए जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) के पद तक पहुंचे थे. ड्यूटी से अनाधिकृत अनुपस्थिति के कारण उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. अपील पर, अपीलीय प्राधिकारी ने सजा को संशोधित करते हुए उन्हें जूनियर इंजीनियर के पद से टेक्नीशियन ग्रेड-III (उनका मूल नियुक्ति पद) पर तीन साल के लिए अवनत कर दिया. पुनरीक्षण प्राधिकारी ने अवनति की अवधि को घटाकर एक साल कर दिया.
कर्मचारी ने इस सजा को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में चुनौती दी, लेकिन ट्रिब्यूनल ने याचिका खारिज कर दी. इसके बाद, कर्मचारी ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की.
कोर्ट की सुनवाई और फैसला
याचिकाकर्ता ने रेलवे सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1968 के नियम 6(vi) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उन्हें जूनियर इंजीनियर के पद से ठीक पहले वाले पद मास्टर क्राफ्ट्समैन पर अवनत किया जाना चाहिए था, न कि सबसे निचले पद टेक्नीशियन ग्रेड-III पर.
हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल शामिल थे, ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर इस तर्क को स्वीकार किया. कोर्ट ने माना कि अपीलीय और पुनरीक्षण दोनों प्राधिकरणों ने उन्हें टेक्नीशियन ग्रेड–III पर अवनत करके अन्यायपूर्ण दंड दिया है.
कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को आंशिक रूप से रद्द करते हुए फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता को एक साल की अवधि के लिए मास्टर क्राफ्ट्समैन के पद पर अवनत किया जाएगा, जबकि पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा लगाई गई अन्य शर्तें यथावत रहेंगी. कोर्ट ने कहा कि किसी प्रोन्नत कर्मचारी को केवल उस पद पर ही अवनत किया जा सकता है जिससे वह प्रोन्नत हुआ था, उससे निचले पद पर नहीं.
इस प्रकार, हाई कोर्ट ने कर्मचारी की रिट याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया.