HC ने 2017 हत्या मामले में 5 लोगों को किया बरी
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2017 के एक हत्या मामले में पांच लोगों को बरी कर दिया, जिन्हें निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने 1 सितंबर को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर और अविश्वसनीय परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था.
हाईकोर्ट ने मुकुलाल साव (76), श्रवण कुमार (24), अशोक पाल (53), सुदामा भुइया (35), और सुनील पासवान (35) की सजा और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया.
कोर्ट ने कहा, "बिना पुष्टि के केवल बरामदगी के आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता. अभियोजन पक्ष विश्वसनीय और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा, जिससे अपीलकर्ताओं की संलिप्तता साबित हो सके. परिस्थितियों का सिलसिला अधूरा और टूटा हुआ है, इसलिए अपीलकर्ताओं को संदेह का लाभ दिया जाता है."
यह मामला 21 जुलाई 2017 को कृष्णा गुप्ता की हत्या से संबंधित था. मृतक के बेटे आनंद गुप्ता ने अपनी मां लालती देवी के बयान के आधार पर शिकायत दर्ज की थी, जिन्होंने कुछ लोगों को अपने पति पर खेत में हमला करते देखा था. पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी.
अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि जमीन विवाद और जादू-टोना के संदेह के कारण हत्या हुई. लालती देवी को एकमात्र चश्मदीद गवाह के रूप में पेश किया गया और एक चाकू, कपड़े और अन्य सामग्री की बरामदगी के आधार पर आरोपियों को जोड़ा गया.
हालांकि, हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के मामले में कई खामियां पाईं. कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी, मर्ग और तहकीकात रिपोर्ट में किसी भी आरोपी का नाम नहीं था. बरामद सामग्री पर फोरेंसिक रिपोर्ट अनिर्णायक थी और बरामद वस्तुओं पर मिला खून पीड़ित के खून से मेल नहीं खाता था.
सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए, हाईकोर्ट ने कहा कि बिना वैज्ञानिक सबूत के केवल खून से सने सामान की बरामदगी दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि आनंद गुप्ता का बयान सुनवाई पर आधारित था और अन्य गवाहों में से कोई भी हत्या का चश्मदीद नहीं था.
"अभियोजन पक्ष का पूरा मामला कमजोर और संदिग्ध सबूतों पर आधारित है," खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए पांचों को बरी कर दिया.