सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

छत्तीसगढ़ में 1,742 हेक्टेयर जंगल के विनाश को रोकें- बृंदा करात

C

CG Khabar

06 अग. 2025, 04:02 PM 3 मिनट में पढ़ें 4

वृंदा करात
वृंदा करात

नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की वरिष्ठ नेता बृंदा करात ने छत्तीसगढ़ में 1,742 हेक्टेयर घने जंगल को नष्ट करने वाले कोयला परियोजना को रोकने की मांग की है. उन्होंने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर कहा कि इस परियोजना से लगभग 4.5 लाख पेड़ कट जायेंगे, जो पर्यावरण के लिये गंभीर खतरा है.


करात ने अपने पत्र में कहा कि केन्ते एक्सटेंशन कोयला परियोजना को छत्तीसगढ़ वन विभाग ने मंजूरी दी है, जो हसदेव-अरंड क्षेत्र का हिस्सा है. इस परियोजना को राजस्थान सरकार के स्वामित्व वाली एक बिजली कंपनी को सौंपा गया है, जिसने अडानी एंटरप्राइजेज के साथ पारसा केन्ते कोलियरीज लिमिटेड नामक संयुक्त उद्यम बनाया है, जिसमें अडानी की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है. 

विज्ञापन


करात ने आरोप लगाया कि इस उद्यम के तहत खनन किया गया कोयला "रिजेक्टेड कोल" के नाम पर निजी कंपनी के बिजली परियोजनाओं में डायवर्ट किया गया है.


उन्होंने कहा, "इस परियोजना को 'सार्वजनिक हित' के नाम पर मंजूरी दी गई है, लेकिन इसमें कोई सार्वजनिक हित नहीं है, बल्कि यह केवल निजी लाभ के लिए खनिज संसाधनों का दोहन है." 


करात ने चेतावनी दी कि इस परियोजना से पहले से ही खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरणीय क्षति और बढ़ जायेगी.


गौरतलब है कि सुरगुजा जिले के वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) द्वारा जून में किये गये निरीक्षण के बाद इस परियोजना के लिये 1,742.60 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की सिफारिश की गई थी. 


करात ने बताया कि इस क्षेत्र में 4.5 लाख से अधिक पेड़ कटने का अनुमान है, जो घने जंगल में कार्बन अवशोषण के लिए महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा, "खुली खनन प्रक्रिया ने पहले ही हजारों पेड़ों को नष्ट कर दिया है, पानी और मिट्टी को प्रदूषित किया है."


करात ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना को ग्राम सभाओं की सहमति के बिना आगे बढ़ाया जा रहा है, जो संविधान और कानूनी ढांचे का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों से 1,500 से अधिक लिखित आपत्तियां सरकार को दी गई थीं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज कर दिया गया.


उन्होंने मंत्री को उनके पिछले बयान की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने कहा था कि वन सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, वन क्षेत्र का नुकसान FRA, 2006 के तहत भूमि के शीर्षक देने के कारण हो रहा है. करात ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वन क्षेत्र का नुकसान तथाकथित विकास परियोजनाओं के कारण हो रहा है.


करात ने जोर देकर कहा, "पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री के रूप में यह आपकी जिम्मेदारी है कि जंगलों को बचाया जाये और निजी कंपनी के हितों के ऊपर जैव-विविधता वाले क्षेत्र की रक्षा की जाये."

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP