छत्तीसगढ़ का पहला ओपन जेल बेमेतरा में तैयार
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के पहले 'ओपन जेल' का निर्माण पूरा कर लिया है, जो जल्द ही कैदियों के पुनर्वास और सुधार के लिए एक नई मिसाल बनने जा रहा है. बेमेतरा जिले के पथरा गांव में करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक सुधार गृह में लगभग 200 कैदियों को रखने की व्यवस्था की गई है.
राज्य सरकार के जेल विभाग की उप सचिव कुसुम एक्का द्वारा जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ जेल मैनुअल 1968 और प्रिज़न्स एक्ट 1894 के तहत इस नई जेल को अधिसूचित कर दिया गया है.
जेल विभाग के डीआईजी एसएस तिग्गा ने पुष्टि की है कि पारंपरिक जेलों की तरह इस खुली जेल में कोई ऊंची दीवारें, लोहे की सलाखें, कटीले तार या हथियारबंद गार्ड नहीं होंगे. यह पूरा सिस्टम कैदियों के स्व-अनुशासन, आपसी भरोसे और अच्छे आचरण पर काम करेगा.
30 एकड़ सरकारी जमीन पर बनी इस अनूठी जेल की योजना पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत की गई थी, जिसके लिए 22.28 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था.
इस ओपन जेल में ट्रांसफर के लिए बेहद कड़े नियम और शर्तें तय की गई हैं. यहां केवल उन्हीं कैदियों को भेजा जाएगा जो आदतन अपराधी नहीं हैं और जिन्होंने पारंपरिक बंद जेलों में रहते हुए उत्कृष्ट अनुशासन व आचरण दिखाया है.
इसके अलावा, जिन लाइफ इम्प्रिजनमेंट (आजीवन कारावास) वाले कैदियों की सजा की अवधि केवल एक से दो साल बची है, उन्हें समाज के साथ दोबारा तालमेल बिठाने के लिए ट्रायल के आधार पर यहां लाया जाएगा.
इस पहल का मुख्य उद्देश्य कैदियों को सजा देने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करना और उन्हें रिहाई के बाद आत्मनिर्भर होकर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करना है.
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