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छत्तीसगढ़: दीपआशा वन भैंसा नहीं, मुर्रा भैंसा!

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23 जुल. 2025, 06:04 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

मुर्रा भैंसा
मुर्रा भैंसा

रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ वन विभाग के उस दावे की सच्चाई अब सामने आ गई है, जिसमें 11 साल पहले विश्व की पहली वन भैंसा क्लोन 'दीपआशा' के जन्म की बात कही गई थी. यह दावा अब गलत साबित हुआ है. 


रायपुर के नितिन सिंघवी ने वन विभाग के दस्तावेजों के सहारे यह जानकारी सार्वजनिक की है कि दीपआशा, जिसे उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की वन भैंसा आशा के सोमेटिक सेल और दिल्ली के बूचड़खाने से प्राप्त भैंस के अंडाशय से क्लोन किया गया था, असल में मुर्रा भैंसा निकली. इसे 12 दिसंबर 2014 को करनाल के नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टिट्यूट में बनाया गया था, जिस पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च हुये थे.


2018 में दीपआशा को नया रायपुर के जंगल सफारी में लाया गया, जहां इसके लिए ढाई करोड़ रुपये का बाड़ा बनाया गया. लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि दीपआशा मुर्रा भैंसा जैसी दिखती है और सात साल से जंगल सफारी में कैद है, जहां केवल वीआईपी ही इसे देख सकते हैं.


दीपआशा की प्रजाति की पुष्टि के लिये उसका डीएनए सैंपल सीसीएमबी हैदराबाद और वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून भेजा गया, लेकिन आज तक कोई रिपोर्ट नहीं आई. 


कुछ लोगों का आरोप है कि वन विभाग ने सच्चाई छिपाने के लिए रिपोर्ट रोक रखी है. इस बीच, मार्च 2025 में वन विभाग ने सीसीएमबी हैदराबाद से पूछा कि क्या बूचड़खाने से प्राप्त अंडाशय के जरिए जंगली भैंस की क्लोनिंग संभव है. सीसीएमबी हैदराबाद ने स्पष्ट किया कि वर्तमान तकनीक से क्लोन का डीएनए पूरी तरह जंगली भैंस से मिलाना संभव नहीं है, क्योंकि इसमें घरेलू भैंस का माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए शामिल हो जाता है.


इससे वन्यजीव प्रेमियों में गुस्सा है कि इतना बड़ा दावा करने से पहले वन विभाग ने तकनीकी संभावनाओं की जांच क्यों नहीं की? 


रायपुर के नितिन सिंघवी, जो दीपआशा को आजाद कराने के लिए लंबे समय से प्रयासरत हैं, ने सवाल उठाया कि यदि दीपआशा मुर्रा भैंसा है, तो उसे कैद में क्यों रखा गया है? 


उन्होंने कहा, "चिड़ियाघरों में घरेलू पशु रखने की अनुमति नहीं है. दीपआशा ने आधी जिंदगी कैद में बिता दी. अगर उसे आजाद किया जाता, तो वह प्रकृति के नियमों के अनुसार अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाती."


सिंघवी ने आरोप लगाया कि वन विभाग डीएनए टेस्ट से बच रहा है, क्योंकि इससे उनकी बदनामी होगी. 


सीसीएमबी हैदराबाद के जवाब के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि दीपआशा को कैद में रखने का क्या औचित्य है और आम लोग इसे क्यों नहीं देख सकते? 


वन विभाग को अब यह स्पष्ट करना चाहिये कि दीपआशा को कैद में रखकर क्या हासिल करना चाहता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP