पहाड़ पर खनन हुआ तो जीव-जंतु, जुरासिक युग के पौधे नष्ट होंगे
दंतेवाड़ा । संवाददाता छत्तीसगढ़ के NMDC नए सयन्त्र के स्थापना की पूरी तैयारी कर चुकी है. डिपॉज़िट 4 इस समय सुर्खियों मे है. करीब 600 हेक्टेयर मे खनन की तैयारी है. दस्तावेजिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. हमेशा की तरह एक लोक सुनवाई और कार्य शुरू कर दिया जाएगा.
विकास का दावा करने वाली कंपनी जैव विविधता को नष्ट कर देगी. इस पहाड़ पर बाघ 100 प्रतिशत होने का दावा वन विभाग के अधिकारी करते आ रहे है. साथ ही विशेष प्रजाति की गिलहरी भी पाई गई है. इतना ही नहीं सांपो की तो कई ऐसी प्रजाति मौजूद है जो सिर्फ इन्ही पर्वतों पर मौजूद है.
जैव विविधता से भरे इस जंगल को नष्ट करने की लगभग तैयारी पूरी हो चुकी है. एक अहम् बात इस पहाड़ की यह भी है, यहां मौजूद गली नाला मे करीब डेढ़ हजार ट्री फर्न है. इन पेड़ों को जूरासिक युगीन कहा जाता है. यदि खनन हुआ तो इन पेड़ों का इतिहास भी बस्तर से मिट जाएगा.
डिपॉजिट 4 नंबर पहाड़ में सतत निगरानी और संरक्षण की आवश्यकता हैं. सरकार चाहे तो वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल बन जाएगा, लेकिन यहां सरकार तो उजाड़ने की तैयारी मे जुटी है. रिजर्व फॉरेस्ट के कम्पार्टमेंट 642,648,649,650,701,702 मे बाघ के पग चिन्ह मिले हैं.
बता दें 2022 नवंबर में जो टाइगर का शिकार हुआ था, वह बैलाडीला का पहाड़ था. शिकारियों RF 642 में विशेष प्रजाति के बाघ को मार डाला था. इस मामले मे पुलिसकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षक तस्करी मे शामिल थे.
हाल ही में सरकार ने रूंगटा माइनिंग और आर्सेलर मित्तल जैसी निजी कंपनियों को डिपॉजिट-1 के A, B, और C खंडों की माइनिंग लीज दे दी है. कुल मिलाकर लगभग 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र अब निजी हाथों में है. सवाल उठता है कि जब पहले से ही बड़े पैमाने पर खनन हो रहा है और ग्रामीण उपेक्षित हैं, तो अब ये किसके हित के लिए किया जा रहा है?
3 जानवरी को कांग्रेस की यूथ विंग पहाड़ बचाओ रैली निकाल रही है. यह रैली भांसी से डिपॉजिट 4 पर स्थित राजा बांग्ला तक जाएगी. यही एक झरना जिसे रानी घाट के नाम से जाना जाता है, बाघ के पद चिन्ह मिले है. जैव विविधता का गुलदस्ता है ये पहाड़.
क्या कांग्रेस का यह आंदोलन इस पहाड़ को खनन से दूर रख पाएगा? पहाड़ बचाव रैली 3 जानवरी को निकाली जानी है. इस पहाड़ के खनन की लगभग पूरी तैयारी nmdc कर चुकी है.
बस्तर में 30 लाख वर्ष पुराने जुरासिक युग के गली नाला ने 1347 ट्री फर्न को संजों कर रखा है. वन विभाग की टीम ने डिपोजिट-4 में इन पौधों की गणना की है. सूत्र बताते है कि एक पेड़ की लंबाई तो सात मीटर है. बकाया पेड़ एक मीटर से सभी लंबे है. 12 किमी लंबे नाले में ये पेड़ है.
यहां का पूरा एरिया डिपोटि-4 में आता है. एनएमडीसी को 600 हेक्ट्यर में खनन करना है. वन विभाग से जुड़े अधिकारिक सूत्र कह रहे हैं कि खनन हुआ तो निश्चत रूप से ये पौधे प्रभावित होगें. इसकी संभावना को देखते हुए स्टडी करने के लिए भारतीय वानकीय एवं अनुसंधान संस्था को रिपोर्ट की है.
इसी वर्ष देहरादून से दो बार टीम रिसर्च कर लौट चुकी है. फिलहाल अभी रिपोर्ट नहीं आई है. एनएमडीसी से इन पेड़ों के संरक्षण के लिए पैसा मांगा था लेकिन वहां से पैसा नही मिला है. इस पूरे नाला को सुरक्षित और संरक्षित करना बेहद जरूरी है.
वन विभाग ने नाले में आंद्रता बनाए रखने के लिए पानी की व्यवस्था की है. इन पौधों के संरक्षण पर विभाग ने अभी तक कोई मास्टर प्लान नही बनाया है. सूत्र बताते है पानी का तेज बहाव भी इन पौधों को नुकसान पहुंचाता है. इस लिए सिर्फ आद्रता ही जरूरी है.
अरुण पांडे, पी सी सी एफ ने कहा मेरा डिपॉजिट 4 का क्षेत्र पूरा घूमा हुआ है. गली नाला मे ट्री फर्न मौजूद है. उसके संरक्षण के लिए प्लानिंग कैम्पा मद से हुई है. जब भी माइनिंग का प्लान बनता है साथ ही जैव विविधता का पूरा ख्याल रखा जाता है. उस पहाड़ पर विशेष प्रजाति के बहुत सारे जीव जंतु है उनके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है.: