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छत्तीसगढ़ 2028-29 तक पूरा बाल विवाह मुक्त होगा

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30 सित. 2025, 02:29 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

बाल विवाह मुक्त
बाल विवाह मुक्त

रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ का बालोद जिला देश का पहला बाव विवाह मुक्त जिला बन गया है. इसके अलावा सूरजपुर की 75 पंचायतें भी बाल विवाह मुख्त हो गई हैं.


केन्द्र सरकार द्वारा 27 अगस्त 2024 को शुरू किए गए “बाल विवाह मुक्त भारत” राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है. राज्य का बालोद जिला पूरे देश का पहला जिला बन गया है, जिसे आधिकारिक रूप से बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा सकता है. बालोद जिले की सभी 436 ग्राम पंचायतों और 09 नगरीय निकायों को विधिवत प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है.

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विगत दो वर्षों में बालोद जिले से बाल विवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया. दस्तावेजों के सत्यापन और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जिले के सभी पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त का दर्जा मिल गया है. इस अभूतपूर्व उपलब्धि के साथ बालोद जिला पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन गया है.


बालोद जिला कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और समुदाय की सामूहिक भागीदारी का परिणाम है. उन्होंने सभी पंचायतों और नगरीय निकायों को इस प्रयास में सक्रिय सहयोग देने के लिए धन्यवाद भी दिया.


सूरजपुर की 75 ग्राम पंचायतें भी बाल विवाह मुक्त


इसके अलावा सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत घोषित किया गया. विगत दो वर्षों में इन पंचायतों से भी बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ. इसे राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है.


बाल विवाह उन्मूलन केवल सरकारी अभियान नहीं, सामाजिक परिवर्तन का संकल्प - मुख्यमंत्री साय


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बाल विवाह उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. हमारा लक्ष्य है कि चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2028-29 तक पूरे राज्य को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाए. यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का संकल्प है. 


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अन्य जिलों में भी पंचायतों और नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. जिन जिलों में पिछले दो वर्षों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है, वहां शीघ्र ही प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे.


समाज और सरकार की साझेदारी से संभव हुआ बाल विवाह उन्मूलन: 


महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया. उन्होंने कहा कि बालोद की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि समाज और सरकार मिलकर कार्य करें तो बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सकता है. सूरजपुर की उपलब्धि भी इस दिशा में एक मजबूत कदम है. 


इस अभियान में यूनिसेफ का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है. संगठन ने तकनीकी सहयोग, जागरूकता कार्यक्रम और निगरानी तंत्र को मजबूत करने में मदद की.


छत्तीसगढ़ की इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर एक मील का पत्थर माना जा रहा है. “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” को गति देने में यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी. 


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छत्तीसगढ़ की तर्ज पर सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा को केंद्र में रखकर काम किया जाए तो देश से बाल विवाह जैसी कुप्रथा का पूर्ण उन्मूलन संभव है.


राज्य सरकार अब चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों को भी बाल विवाह मुक्त बनाने की तैयारी कर रही है. 


2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य न केवल राज्य, बल्कि देश को बाल विवाह मुक्त भारत के संकल्प के और निकट ले जाएगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP