बीजापुर पोटा केबिन मामले पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित पोटा केबिन छात्रावास से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है. सरकारी छात्रावास में रहने वाली तीन आदिवासी छात्राओं के गर्भवती होने की सूचना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
इस संवेदनशील मामले पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा रुख अपनाते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इस घटना को मानवता के लिए शर्मनाक बताते हुए आरोप लगाया कि आश्रम प्रबंधन ने पुलिस को सूचित करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की और पीड़ित बच्चियों को घर भेज दिया.
बैज ने स्पष्ट किया कि पाक्सो एक्ट की धारा 19 के तहत प्रबंधन की जिम्मेदारी पुलिस को सूचना देने की थी, जिसमें वे पूरी तरह विफल रहे.
दीपक बैज ने पूर्व की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में जब से सत्ता परिवर्तन हुआ है, सरकारी छात्रावासों में बेटियां सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं.
उन्होंने सुकमा और कोरबा की पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए वर्तमान सरकार की तुलना रमन सिंह के कार्यकाल के दौरान हुए 'झलियामारी कांड' से की. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री के आदिवासी होने के बावजूद समाज की बेटियों को सुरक्षा नहीं मिल पा रही है.
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने एक विशेष जांच दल गठित करने का निर्णय लिया है जो जमीनी स्तर पर तथ्यों की पड़ताल करेगा. साथ ही, विपक्ष ने मांग की है कि प्रदेश के सभी छात्रावासों की सुरक्षा समीक्षा की जाए और महिला पुलिस द्वारा नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए.
इसके अतिरिक्त, दीपक बैज ने राजधानी रायपुर की कानून व्यवस्था पर भी चिंता जताई है.
उन्होंने कहा कि राजधानी अब अपराधों के केंद्र में तब्दील होती जा रही है, जहाँ आए दिन चाकूबाजी और गैंगवार की खबरें आम हो गई हैं.
पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों में कानून का भय खत्म हो चुका है और सत्ता पक्ष के नेताओं के हस्तक्षेप के कारण पुलिस का मनोबल गिरा हुआ है. कांग्रेस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अपराधियों और लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.