बीजापुर हत्याकांड का खुलासा: पहली पत्नी और बेटे ने की हत्या
बीजापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नैमेड़ थाना क्षेत्र के मूसालूर गांव के निकट जंगल में 28 नवंबर 2025 को मिले एक अज्ञात पुरुष के शव ने पुलिस को जांच की ओर अग्रसर किया. शुरुआत में अज्ञात शव के रूप में दर्ज इस मामले की जांच तेज होने पर अब यह साफ हो चुका है कि यह कोई साधारण हत्या नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित साजिश थी.
पुलिस ने तकनीकी सुरागों के आधार पर मामले को सुलझाते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें मृतक की पहली पत्नी माहरी मज्जी (उर्फ सोमली, 55 वर्ष), उसका बेटा शंकर मज्जी (35 वर्ष) और रमेश मज्जी (45 वर्ष) शामिल हैं. तीनों को 23 जनवरी 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया.
जांच में सामने आया कि मृतक की पहचान नैमेड़ निवासी बदरू उरसा के रूप में हुई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, सिर और चेहरे पर ठोस वस्तु से किए गए गंभीर प्रहार के कारण उनकी मौत हुई थी. इस आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था.
मोबाइल कॉल डिटेल्स, टावर लोकेशन और अन्य तकनीकी जांच से पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले. घटना के दिन तीनों आरोपियों की लोकेशन जंगल के आसपास दर्ज हुई थी और उनके बीच लगातार संपर्क साबित हुआ. हत्या के बाद शंकर और रमेश तेलंगाना भाग गए थे, जहां से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया.
पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म कबूल लिया. उन्होंने बताया कि बदरू उरसा ने माहरी मज्जी को कई साल तक पत्नी के रूप में रखने के बाद दूसरी महिला लाने के बहाने घर से निकाल दिया था.
इसी रोष में माहरी, उसके बेटे शंकर और रमेश ने मिलकर हत्या की साजिश रची. योजना के तहत रमेश और शंकर ने मूसालूर जंगल में बदरू पर लकड़ी के डंडे से जानलेवा हमला किया. प्रहार इतने भीषण थे कि मृतक की मौके पर ही मौत हो गई. शव को झाड़ियों में छिपा दिया गया. पुलिस ने घटना में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया है.
पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, अतिरिक्त एसपी चंद्रकांत गवर्ना और एसडीओपी बृज किशोर यादव के निर्देशन में नैमेड़ थाना पुलिस और साइबर सेल की टीम ने इस सनसनीखेज मामले को सफलतापूर्वक सुलझाया.