शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

CBI-ED जांच के ख़िलाफ़ भूपेश बघेल की सुप्रीम कोर्ट में याचिका

CBI-ED जांच पर भूपेश बघेल ने SC में दी चुनौती

C

CG Khabar

03 अग. 2025, 12:49 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

भूपेश बघेल
भूपेश बघेल

नई दिल्ली । डेस्क: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल ने कथित शराब घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच एजेंसियों केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकार क्षेत्र और वैधानिकता पर सवाल उठाते हुये सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. यह याचिका कथित तौर पर 2,160 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ी अनियमितताओं की जांच को लेकर दायर की गई है, जो भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुआ था.


याचिका में मांग की गई है कि धन शोधन निवारण अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत इन एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र की स्पष्टता प्रदान की जाये. यह मामला सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिये सूचीबद्ध है.


कांग्रेस पार्टी ने बघेल के समर्थन में रायपुर, जगदलपुर और अन्य जिलों में प्रदर्शन किये, जिसमें भाजपा नीत केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को डराने का आरोप लगाया गया. भूपेश बघेल ने अपने बेटे चैतन्य की गिरफ्तारी और भिलाई स्थित उनके आवास पर छापेमारी को राजनीति से प्रेरित बताया. 

उन्होंने कहा, “ED का उपयोग विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिये किया जा रहा है. मेरे बेटे के जन्मदिन पर गिरफ्तारी का समय केंद्र की प्रतिशोधी राजनीति का प्रतीक है.”


18 जुलाई 2025 को, जो चैतन्य का जन्मदिन भी था, ED ने भिलाई, दुर्ग जिले में बघेल परिवार के आवास पर सुबह-सुबह छापेमारी की और चैतन्य को PMLA की धारा 19 के तहत हिरासत में लिया. 


ED ने छापेमारी के दौरान असहयोग का हवाला देते हुए तत्काल गिरफ्तारी की. बघेल ने इस कार्रवाई को “केंद्र सरकार का जन्मदिन उपहार” करार देते हुये इसकी निंदा की.


ED का दावा है कि चैतन्य बघेल ने 16.70 करोड़ रुपये की अवैध धनराशि प्राप्त की और रियल एस्टेट व अन्य माध्यमों से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 


एजेंसी का कहना है कि इस घोटाले में एक समानांतर शराब वितरण नेटवर्क के माध्यम से अवैध बिक्री और कमीशन के जरिये भारी रकम का गबन किया गया, जिसमें कई राजनीतिक और नौकरशाही हस्तियां शामिल थीं.


इससे पहले, 10 मार्च 2025 को भूपेश बघेल के भिलाई आवास पर ED ने पहली बार छापेमारी की थी. 


बघेल ने दावा किया कि यह छापेमारी उन्हें राज्य बजट सत्र में भाग लेने से रोकने के लिये की गई थी. 


मार्च की छापेमारी और जुलाई की गिरफ्तारी के बीच उनके बेटे को कोई औपचारिक नोटिस या पूछताछ नहीं भेजी गई, जिससे प्रक्रियात्मक निष्पक्षता पर सवाल उठे.


यह मामला केंद्रीय एजेंसियों के विपक्षी नेताओं के खिलाफ उपयोग को लेकर व्यापक बहस का केंद्र बन गया है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP