बस्तर: 'इल्वत पंचायत' के तहत गांव को 'नक्सल मुक्त' घोषित करने होड़
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में राज्य सरकार की 'इल्वत पंचायत' (साफ-सुथरी पंचायत) योजना के तहत, अब ग्रामीण खुद आगे आकर अपने गांवों को 'नक्सल मुक्त' घोषित करने की मांग कर रहे हैं. इस योजना के तहत प्रमाणित होने वाली पंचायतों को 1 करोड़ रुपये का विशेष विकास अनुदान और बुनियादी सुविधाओं में प्राथमिकता दी जाएगी.
सरकार की 'नियत नेल्ला नार' पहल के तहत शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य उन गांवों को पहचान देना है, जहां अब माओवादी उपस्थिति खत्म हो चुकी है. हाल ही में सुकमा जिले के बड़ेसत्ती और केरलपेंद्रा गांव इस मॉडल के तहत पहले से ही नक्सल मुक्त प्रमाणित हो चुके हैं. अब केतुलनार पेठा, मंगापेठा, रानी बोदली, अम्बेली और दरभा जैसे गांवों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं.
उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने हाल ही में सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर का दौरा कर स्थानीय जन प्रतिनिधियों से मुलाकात की. उन्होंने स्पष्ट किया कि सबसे पहले ग्राम सभा को प्रस्ताव पारित करना होगा कि गांव का कोई भी निवासी माओवादी गतिविधियों में शामिल नहीं है.
बस्तर आईजी पी. सुंदरराज के अनुसार, केवल वही गांव पात्र होंगे जो ऐतिहासिक रूप से नक्सल प्रभावित रहे हैं. शांत इलाकों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा. कम से कम एक साल तक गांव में कोई हिंसा, भर्ती या सशस्त्र कैडरों की आवाजाही नहीं होनी चाहिए. यदि ग्रामीण नक्सलियों के आत्मसमर्पण या सूचना देने में मदद करते हैं, तो उनकी दावेदारी मजबूत होगी.
सरकार अब एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर रही है. इसमें ग्राम सभा की तारीखों से लेकर पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सत्यापन की समय सीमा तय की जाएगी. सत्यापन प्रक्रिया में करीब 2-3 महीने का समय लगेगा. अधिकारियों ने चेतावनी भी दी है कि यदि प्रमाणन के बाद कोई गांव माओवादियों को शरण देते पाया गया, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के पारंपरिक समुदाय प्रमुखों (गायता, सिरहा, पुजारी, बैगा) से संवाद करते हुए भावुक अपील की. उन्होंने कहा कि हिंसा और विकास का रास्ता अलग-अलग है. उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे जंगलों में भटक रहे युवाओं को वापस लौटने और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें.