छत्तीसगढ़ विधानसभा: 'धान का कटोरा' बनाम 'अफीम का कटोरा' पर तीखी नोकझोंक
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा के सोमवार के सत्र में दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती का मामला एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया. सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी दल कांग्रेस और सत्ताधारी भाजपा के बीच जबरदस्त बहस हुई, जिसके चलते भारी हंगामा हुआ और अंततः कांग्रेस के 29 विधायकों को निलंबित कर दिया गया.
विपक्ष के नेता चरणदास महंत ने इस मुद्दे को उठाते हुए छत्तीसगढ़ की पहचान पर सवाल खड़े किए और कहा कि जिस राज्य को 'धान का कटोरा' कहा जाता है, उसे अब 'अफीम का कटोरा' बनाया जा रहा है.
विपक्ष ने इस पूरे मामले पर काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की थी, जिसे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद कांग्रेसी विधायक सदन के गर्भगृह में उतर आए और नारेबाजी शुरू कर दी.
विपक्ष ने इस स्थिति को 'उड़ता छत्तीसगढ़' का नाम देते हुए आरोप लगाया कि सरकार किसानों से धान खरीदने के बजाय अफीम की खेती को बढ़ावा दे रही है.
घटनाक्रम की जड़ें 6 मार्च को दुर्ग जिले के समोदा गांव में हुई पुलिस छापेमारी से जुड़ी हैं, जहां मक्के की फसल के बीच छिपाई गई लगभग 4-5 एकड़ अफीम की फसल बरामद की गई थी. जब्त की गई अफीम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 8 करोड़ रुपये आंकी गई है.
इस मामले में एक स्थानीय भाजपा किसान मोर्चा के नेता की गिरफ्तारी भी हुई है, जिन्हें पार्टी ने तत्काल निलंबित कर दिया है.
चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि राजधानी से महज 50 किलोमीटर दूर इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती बिना प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है. उन्होंने इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विधायकों की समिति से कराने की मांग की.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्राथमिकी में मुख्य आरोपी के बजाय नौकरों को प्राथमिकता दी गई है, जो असली दोषियों को बचाने की साजिश लगती है.
वहीं, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए कहा कि यह खेती वर्षों से चल रही थी और तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मंत्रियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
सदन में जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पुलिस ने सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की है और एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नशे के खिलाफ सख्त है और पिछले दो वर्षों में हजारों गिरफ्तारियां की गई हैं.
हालांकि, सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने हंगामा जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप सदन की कार्यवाही बाधित हुई और विधायकों का निलंबन हुआ.