छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता ने दिया इस्तीफा
छत्तीसगढ़ महाधिवक्ता ने राज्यपाल को सौंपा त्यागपत्र
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना त्यागपत्र राज्यपाल रामेन डेका के समक्ष प्रस्तुत किया, लेकिन अभी तक इसकी स्वीकृति पर कोई स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. राजभवन और महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से चुप्पी बरती जा रही है, जबकि सूत्र बताते हैं कि इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय चर्चाएं तेज हैं और कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श चल रहा है. जल्द ही औपचारिक ऐलान की उम्मीद जताई जा रही है.
प्रफुल्ल भारत का कानूनी सफर राज्य की न्यायिक व्यवस्था से गहराई से जुड़ा रहा है. जगदलपुर में 22 जून 1966 को जन्मे प्रफुल्ल ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई बस्तर में पूरी की, उसके बाद एमए और एलएलबी की डिग्री हासिल की. 1992 में मध्य प्रदेश बार काउंसिल, जबलपुर से वकील के रूप में पंजीकरण कराकर उन्होंने अपना व्यावसायिक जीवन शुरू किया. पहले बस्तर जिला अदालत में 1992 से 1995 तक काम किया, फिर 1995 से 2000 तक मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में प्रैक्टिस की.
छत्तीसगढ़ बनने के बाद 2000 से बिलासपुर हाईकोर्ट में सक्रिय रहे, जहां उनकी कुशल वकालत, मुकदमों की मजबूत रणनीति और सरकारी मामलों में बारीक कानूनी विश्लेषण ने उन्हें प्रमुख वकीलों की फेहरिस्त में जगह दिलाई.
राज्य के प्रथम विधि अधिकारी के तौर पर प्रफुल्ल का कार्यकाल चुनौतियों भरा लेकिन सम्मानजनक रहा. त्यागपत्र में उन्होंने लिखा कि उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में राज्य के अधिकारों की पैरवी एक कठिन जिम्मेदारी थी, जिसमें महाधिवक्ता दफ्तर के अधिकारियों और प्रशासनिक टीम ने उनका भरपूर समर्थन किया.
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रिमंडल और पूरी नौकरशाही को आभार व्यक्त किया. साथ ही राज्यपाल को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सेवा का मौका उनके लिए गौरव का विषय था.
पिछले साल 12 जनवरी 2024 को उन्हें महाधिवक्ता बनाया गया था, इससे पहले 2014 से 2018 तक पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के दौर में वे अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे. 2021 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया.
लगभग एक साल बाद ही यह अप्रत्याशित कदम उठाने से कानूनी हलकों में सनसनी मच गई है. अब इस्तीफे के पीछे के कारणों और उनके भविष्य के प्लान पर राजनीतिक और विधिक नजरें गड़ाए हुए हैं.