केन्द्र सरकार ने FCRA संशोधन विधेयक को ठंडे बस्ते में डाला
नई दिल्ली । डेस्क: बजट सत्र के दौरान संसद में भारी हंगामे और विपक्ष के कड़े विरोध के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक को टालने का फैसला किया है. बुधवार को लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार इस सत्र में इस विधेयक को चर्चा या पारित कराने के लिए नहीं लाएगी.
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विशेष रूप से केरल के विपक्षी सांसदों ने विधेयक के प्रावधानों को लेकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके कारण सदन को स्थगित भी करना पड़ा.
मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और वामपंथी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि केरल विधानसभा चुनावों को देखते हुए विपक्ष इस विधेयक के बारे में जानबूझकर गलत जानकारी और भ्रम फैला रहा है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह विधेयक किसी विशेष धर्म या संगठन के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका एकमात्र उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना और विदेशी फंड के दुरुपयोग को रोकना है.
सरकार का कहना है कि विधेयक के माध्यम से उन गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक 'नामित प्राधिकरण' बनाने का प्रस्ताव है जिनका पंजीकरण रद्द या निलंबित हो चुका है.
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष के विरोध के साथ-साथ केरल भाजपा इकाई के दबाव ने भी सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है.
केरल में भाजपा पिछले कुछ समय से ईसाई समुदाय के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस विधेयक के आने से वहां यह विमर्श बनने लगा था कि इसके जरिए चर्च जैसे अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाया जा सकता है. ऐसे में चुनाव से ठीक पहले किसी भी तरह के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए सरकार ने फिलहाल इस कदम को ठंडे बस्ते में डालना ही उचित समझा है.