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केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया

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10 मार्च 2026, 08:56 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

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नई दिल्ली । डेस्क: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की शक्तियों का उपयोग करते हुए प्राकृतिक गैस के आवंटन के लिए एक नई 'टियर-आधारित' प्राथमिकता संरचना लागू की है. 9 मार्च को जारी आधिकारिक गजट अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाली एलएनजी (LNG) शिपमेंट में बाधा आने और भारतीय आपूर्तिकर्ताओं द्वारा 'फोर्स मेज्योर' घोषित किए जाने के कारण उठाया गया है. 


वर्तमान में भारत अपनी प्राकृतिक गैस की कुल जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 30 प्रतिशत महत्वपूर्ण हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है.

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मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत, आम जनता से जुड़े क्षेत्रों को राहत देते हुए घरेलू पाइप प्राकृतिक गैस (PNG), वाहनों के लिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और एलपीजी (LPG) उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. इन क्षेत्रों को उनकी पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर शत-प्रतिशत (100%) निर्बाध आपूर्ति प्रदान की जाएगी. 


इसके अलावा, कृषि क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उर्वरक संयंत्रों के लिए उनकी औसत खपत का 70 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया गया है. औद्योगिक और विनिर्माण इकाइयों को प्राकृतिक गैस ग्रिड के माध्यम से उनकी आवश्यकता का 80 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया जाएगा. 


इस पुनर्आवंटन को सफल बनाने के लिए सरकार ने बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं जैसे ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड, गेल पाटा पेट्रोकेमिकल और रिलायंस O2C को होने वाली आपूर्ति में पूर्ण या आंशिक कटौती का निर्णय लिया है. 


साथ ही, तेल रिफाइनिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी गैस खपत को घटाकर 65 प्रतिशत तक सीमित करें, ताकि सीमित संसाधनों का सही दिशा में उपयोग हो सके.


गौरतलब है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 भारत की संसद द्वारा पारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य आम जनता के लिए अनिवार्य वस्तुओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना और उन्हें जमाखोरी या कालाबाजारी से बचाना है. 


यह अधिनियम केंद्र सरकार को शक्ति देता है कि वह किसी भी ऐसी वस्तु को 'आवश्यक वस्तु' घोषित कर सके, जिसकी आपूर्ति में कमी या वितरण में अव्यवस्था समाज के लिए हानिकारक हो सकती है. 


इस कानून के तहत सरकार दवाओं, उर्वरकों, पेट्रोलियम उत्पादों, खाद्य तेलों और खाद्यान्न जैसी वस्तुओं के उत्पादन, वितरण, भंडारण और व्यापार को नियंत्रित कर सकती है. जब भी देश में किसी संकट, युद्ध या प्राकृतिक आपदा के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है, तो सरकार इस अधिनियम को लागू कर व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा तय कर देती है, ताकि माल को अनुचित लाभ के लिए दबाया न जा सके. 


यह कानून न केवल कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि समाज के कमजोर वर्गों तक बुनियादी संसाधनों की पहुंच बनी रहे. 


इसके उल्लंघन की स्थिति में सरकार को लाइसेंस रद्द करने, स्टॉक जब्त करने और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है. वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, प्राकृतिक गैस के आवंटन के लिए इस कानून का उपयोग यह दर्शाता है कि ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू ईंधन की उपलब्धता को अब राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जा रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP