CBSE डाटा लीक: हैकर के दावे और मूल्यांकन विवाद से मचा हड़कंप
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था रविवार को उस समय गंभीर सवालों के घेरे में आ गई, जब एक एथिकल हैकर ने क्लाउड स्टोरेज से छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मुख्य डेटा हैक करने का सनसनीखेज दावा किया. 'निसर्ग' नाम के इस हैकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बकायदा 18 स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां पोस्ट कर दीं, जिसने सीबीएसई के डेटा सुरक्षा तंत्र की पोल खोलकर रख दी है.
हैकर के मुताबिक, सीबीएसई ने अपने अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) बकेट को ठीक से कॉन्फ़िगर नहीं किया था, जिससे बिना किसी ऑथेंटिकेशन के कोई भी इंटरनेट उपयोगकर्ता विभिन्न संस्थानों की उत्तर पुस्तिकाओं और प्रश्नपत्रों को आसानी से डाउनलोड कर सकता था. इस सुरक्षा चूक ने देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड के तकनीकी नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस बीच, लीक हुई उत्तर पुस्तिकाओं की खराब गुणवत्ता ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है. सोशल मीडिया पर सामने आई कॉपियों में सिलवटें और परछाइयां साफ दिखाई दे रही हैं, जो इस बात का इशारा हैं कि इन्हें पेशेवर स्कैनिंग मशीनों के बजाय मोबाइल फोन से स्कैन किया गया है.
शिक्षक और स्कूल प्राचार्यों का मानना है कि इस साल छात्रों को उम्मीद से बेहद कम अंक मिलने की एक बड़ी वजह यह खराब स्कैनिंग भी हो सकती है. विवाद बढ़ता देख सीबीएसई ने अपनी गलती मानने के बजाय तकनीकी सहायता प्रदान करने वाली हैदराबाद की कंपनी 'कोएम्प्ट' (COEMPT) पर ठीकरा फोड़ दिया है.
बोर्ड ने कहा है कि सरकारी सुरक्षा एजेंसियों और आईआईटी के विशेषज्ञों की एक टीम को सिस्टम को मजबूत करने और इसे सुरक्षित सेटअप पर स्थानांतरित करने के लिए तैनात किया गया है. हालांकि, आईआईटी खड़गपुर के सेवानिवृत्त कंप्यूटर साइंस प्रोफेसर राजीव कुमार का कहना है कि सीबीएसई केवल अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है और नेतृत्व को छात्रों की गोपनीयता की कोई परवाह नहीं है. उन्होंने मांग की है कि बोर्ड को कक्षा 12वीं के परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों से तुरंत माफी मांगनी चाहिए.
यह पूरा मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो चुका है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि सीबीएसई ने मई 2025 के अपने टेंडर में उत्तर पुस्तिकाओं को न्यूनतम 300 DPI पर ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर से स्कैन करने की शर्त रखी थी, लेकिन अगस्त में दोबारा जारी किए गए टेंडर से इन शर्तों को चुपचाप हटा दिया गया.
राहुल गांधी ने दावा किया कि कोएम्प्ट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कॉपियों को मोबाइल फोन से स्कैन किया गया. उन्होंने इसे देश के 18.5 लाख बच्चों के भविष्य के साथ हुआ एक बड़ा 'फर्जीवाड़ा' करार दिया है.
वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर रोबोटिक स्कैनर की शर्त क्यों हटाई गई और इतनी घटिया गुणवत्ता की स्कैनिंग क्यों की गई? इस साल शुरू की गई 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम' योजना अब पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है, जहां एक तरफ लाखों छात्र कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ सीबीएसई का री-इवैल्युएशन पोर्टल भी तकनीकी खामियों के कारण ठप पड़ा है.