2025 में घटिया दवाओं के मामलों में दो गुना बढ़ोतरी
नई दिल्ली । डेस्क: भारत में औषधि नियामकों की सक्रियता के चलते साल 2025 के दौरान मानक गुणवत्ता पर खरी न उतरने वाली (NSQ) दवाओं के मामलों में दो गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में कुल 1,879 दवा नमूनों को 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' घोषित किया गया, जबकि साल 2024 में यह संख्या महज 877 थी.
इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से डेटा साझा करने में आई तेजी और सघन चेकिंग अभियान को माना जा रहा है.
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2025 में घोषित कुल NSQ नमूनों में से लगभग 62 प्रतिशत (1,163 नमूने) राज्यों की रिपोर्टिंग से आए हैं, जो पिछले साल के 39 प्रतिशत के मुकाबले काफी अधिक है.
CDSCO की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों द्वारा घटिया दवाओं की रिपोर्टिंग में 2024 की आखिरी तिमाही से ही तेजी आने लगी थी. हालांकि, नियामक ने स्पष्ट किया है कि किसी विशेष बैच के नमूने का परीक्षण में विफल होना उस विशिष्ट उत्पाद तक ही सीमित है और इसका मतलब बाजार में उपलब्ध अन्य उत्पादों पर सवाल उठाना नहीं है.
गौरतलब है कि CDSCO और ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) लगातार राज्यों से समय पर डेटा साझा करने का आग्रह कर रहे हैं ताकि देश में दवाओं की गुणवत्ता का एक व्यापक डेटाबेस तैयार किया जा सके.
दवाओं की निगरानी को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए CDSCO ने हाल ही में NSQ और नकली दवाओं से जुड़े अलर्ट को डिजिटल और सर्च करने योग्य भी बना दिया है, जिससे आम जनता और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग आसानी से घटिया दवाओं की पहचान कर सकें. Symbolic Photo