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कनाडा ने अमेरिकी दबाव को दरकिनार कर चीन से समझौता किया

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17 जन. 2026, 07:07 PM 5 मिनट में पढ़ें 1

Canadian Prime Minister Mark Carney
Canadian Prime Minister Mark Carney

सीजी खबर डेस्क: अमेरिका के लगातार दबाव और वैश्विक व्यापार में बढ़ते तनाव के बीच कनाडा ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाते हुए चीन के साथ व्यापक व्यापार समझौता किया है. इस फैसले को न केवल अमेरिका के प्रभाव से हटकर कनाडा की स्वतंत्र व्यापार नीति के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह संकेत भी माना जा रहा है कि ओटावा अब अपनी अर्थव्यवस्था और निर्यात हितों की रक्षा के लिए नए साझेदारों के साथ रिश्ते मजबूत करने के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है.


चीन और कनाडा के नेताओं की हालिया बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), स्टील, एल्युमिनियम, कैनोला तथा कृषि और जलीय उत्पादों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे व्यापार विवादों को सुलझाने पर सहमति बनी. समझौते के तहत दोनों देशों ने बातचीत और आपसी सहमति के जरिए व्यापार नियमों को आगे बढ़ाने का संकल्प जताया है, जिसे बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है.


इस समझौते का सबसे चर्चित पहलू चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर कनाडा का फैसला है. कनाडा ने अपने बाजार में 49,000 तक चीनी ईवी आयात की अनुमति देने का निर्णय लिया है. इन वाहनों पर अब केवल 6.1 प्रतिशत का ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ टैरिफ लगेगा. यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इससे पहले अमेरिका के अनुरोध और दबाव में कनाडा ने 2024 में चीनी ईवी पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था. अब उस नीति को पलटते हुए कनाडा ने आयात कोटा के जरिए शुल्क में भारी कटौती कर दी है.


कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस फैसले को उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था दोनों के हित में बताया. उन्होंने कहा कि अत्यधिक टैरिफ हटाकर और आयात कोटा अपनाकर कनाडा अपने साझेदारों के साथ व्यापार की पूरी क्षमता का लाभ उठा सकेगा और घरेलू बाजार में कीमतें कम होंगी. साफ है कि यह निर्णय अमेरिकी संरक्षणवादी रुख से अलग दिशा में जाता है.


इस समझौते के बदले चीन ने भी कनाडा को ठोस रियायतें दी हैं. चीन ने भरोसा दिलाया है कि मार्च 1 तक वह कनाडाई कैनोला बीज पर टैरिफ घटाकर कुल मिलाकर लगभग 15 प्रतिशत कर देगा. इसके अलावा कैनोला मील, मटर, लॉबस्टर और केकड़े जैसे उत्पादों पर लगाए गए ‘एंटी-डिस्क्रिमिनेशन टैरिफ’ भी हटाए जाएंगे. इससे कनाडा के किसानों और समुद्री उत्पाद निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.


चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कनाडा के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि चीनी ईवी पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देना सही दिशा में उठाया गया सकारात्मक कदम है. मंत्रालय के अनुसार, मित्रतापूर्ण बातचीत के जरिए एक निष्पक्ष, स्थिर और गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार वातावरण बनाया जा सकता है, जिससे दोनों देशों को लाभ होगा.


अमेरिका की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली रही. अमेरिकी परिवहन सचिव शॉन डफी ने चेतावनी दी कि कनाडा को चीनी ईवी आयात की अनुमति देने का “पछतावा” होगा और ऐसे वाहन अमेरिका में प्रवेश नहीं कर पाएंगे. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने भी इस फैसले को “समस्याजनक” बताते हुए कहा कि अमेरिका में चीनी कारों की बिक्री कम इसलिए है क्योंकि वहां अमेरिकी ऑटो उद्योग और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए ऊंचे टैरिफ लगाए गए हैं.


हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस मुद्दे पर एकराय नहीं दिखी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कनाडा के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि अगर कोई देश चीन के साथ व्यापार समझौता कर सकता है, तो उसे ऐसा करना चाहिए. यह बयान अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी रुख को उजागर करता है.


चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की आपत्ति उसके संकीर्ण और अमेरिका-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है. चीनी एकेडमी ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन के वरिष्ठ शोधकर्ता झोउ मी के अनुसार, यह मान लेना कि चीनी उत्पाद किसी देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएंगे, व्यावहारिक सोच नहीं है. उन्होंने कहा कि ईवी जैसे उभरते क्षेत्रों में चीनी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, तकनीक सस्ती होगी और उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा.


यूरोपीय देशों की ओर से भले ही आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने न आई हो, लेकिन वहां के मीडिया ने इसे अमेरिका से दूरी बनाते हुए कनाडा की नई व्यापार रणनीति के रूप में देखा है. बीबीसी ने इसे अमेरिका पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा संकेत बताया, जबकि ‘द गार्जियन’ ने कहा कि कनाडा चीन के साथ संबंध सुधारकर अपने व्यापारिक विकल्पों को विविध बना रहा है. डॉयचे वेले ने भी इसे अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच संतुलन साधने की कोशिश करार दिया.


कनाडा के भीतर इस समझौते का व्यापक समर्थन दिख रहा है. सस्केचेवान प्रांत के प्रीमियर स्कॉट मो ने कहा कि इससे उनके प्रांत के कैनोला निर्यात फिर से सामान्य स्तर पर लौट सकेंगे. कृषि संगठनों के मुताबिक, टैरिफ के चलते चीन को कनाडा से मटर का निर्यात लगभग बंद हो गया था और करीब 700 मिलियन डॉलर का व्यापार रूस की ओर चला गया था. अब किसानों को समय रहते राहत मिलने की उम्मीद है.


प्रधानमंत्री कार्नी ने साफ कहा कि चीन के साथ कनाडा के संबंध अमेरिका की तुलना में “ज्यादा पूर्वानुमेय” हैं. उनके अनुसार, चीन के साथ स्पष्ट और निरंतर संवाद से ठोस नतीजे सामने आ रहे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन–कनाडा समझौता इस बात का उदाहरण है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद देश अपने हित में स्वतंत्र फैसले ले सकते हैं.


कुल मिलाकर, यह समझौता दर्शाता है कि वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिकी संरक्षणवाद के दौर में भी देश आपसी सहयोग और बातचीत के जरिए नए रास्ते तलाश सकते हैं. कनाडा का यह कदम न केवल उसकी व्यापार नीति में बदलाव का संकेत है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बहुपक्षीयता और व्यावहारिक सहयोग अब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए प्रासंगिक और जरूरी हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP