अब 'हर्बल टी' कहना होगा गैरकानूनी: FSSAI ने कड़ा किया नियम
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए हर्बल या प्लांट-आधारित अर्क के लिए "चाय" या "टी" शब्द के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. 24 दिसंबर को जारी इस स्पष्टीकरण में रेगुलेटर ने चेतावनी दी है कि जो पेय पदार्थ 'कैमलिया साइनेसिस' (चाय का पौधा) के पौधे से नहीं बने हैं, उन्हें चाय के रूप में बेचना कानूनन 'मिसब्रांडिंग' माना जाएगा.
FSSAI ने पाया कि कई कंपनियां रूइबोस टी, हर्बल टी और फ्लावर टी जैसे नामों से उत्पाद बेच रही हैं, जो वास्तव में चाय नहीं हैं.
नए नियमों के अनुसार, केवल वही उत्पाद चाय के रूप में बेचे जा सकते हैं जो विशेष रूप से कैमलिया साइनेसिस पौधे से प्राप्त होते हैं. इसमें कांगड़ा चाय, ग्रीन टी और सॉलिड फॉर्म वाली इंस्टेंट टी शामिल हैं.
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अन्य पौधों या जड़ी-बूटियों से बने मिश्रणों को अब उनके वास्तविक स्वरूप के आधार पर लेबल करना होगा, न कि चाय के नाम पर.
खाद्य नियामक ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, निर्माताओं और आयातकों सहित सभी हितधारकों को इस नियम का पालन करने का निर्देश दिया है.
राज्य खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और क्षेत्रीय निदेशकों को आदेश दिया गया है कि वे इस निर्देश का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें.
चाय उद्योग के जानकारों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे उपभोक्ताओं के बीच भ्रम दूर होगा और बाजार में शुद्ध चाय की पहचान बनी रहेगी.
कैमलिया साइनेसिस-
बता दें कि कैमलिया साइनेसिस (Camellia sinensis) वह सदाबहार पौधा है जिससे दुनिया की लगभग सभी वास्तविक चाय (जैसे काली, हरी और सफेद चाय) प्राप्त की जाती है. यह मुख्य रूप से एशिया का है, लेकिन अब दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है.
यहाँ इस पौधे के बारे में कुछ मुख्य जानकारियां दी गई हैं:
एक ही पौधे से अलग-अलग चाय: क्या आप जानते हैं कि ब्लैक टी, ग्रीन टी, व्हाइट टी और ऊलोंग टी सभी एक ही पौधे 'कैमलिया साइनेसिस' से आती हैं? इनके बीच का अंतर केवल पत्तियों को तोड़ने के समय और उनके प्रसंस्करण (Processing) या ऑक्सीकरण (Oxidation) के स्तर पर निर्भर करता है.
प्रजातियां: इसकी मुख्य रूप से दो किस्में व्यावसायिक रूप से उगाई जाती हैं:
कैमलिया साइनेसिस साइनेसिस: यह छोटे पत्तों वाली किस्म है जो ठंडी जलवायु और ऊंचाई वाले क्षेत्रों (जैसे दार्जिलिंग) के लिए उपयुक्त है.
कैमलिया साइनेसिस असामिका: यह बड़े पत्तों वाली किस्म है जो असम जैसे गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में अधिक पनपती है.
दिखावट: प्राकृतिक अवस्था में यह एक छोटा पेड़ बन सकता है, लेकिन चाय के बागानों में इसे अक्सर एक झाड़ी (लगभग 3-4 फीट) के रूप में काटा और बनाए रखा जाता है ताकि पत्तियां तोड़ने में आसानी हो. इसकी पत्तियां चमकदार हरी और किनारे से दांतेदार होती हैं.
सक्रिय तत्व: इस पौधे की पत्तियों में कैफीन, एल-थीनिन (L-theanine) और एंटीऑक्सीडेंट (जैसे कैटेचिन) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इसे ऊर्जावान और स्वास्थ्यवर्धक पेय बनाते हैं.