CAG: रेलवे स्टेशनों के नलों के पानी में मिला खतरनाक E. coli बैक्टीरिया
नई दिल्ली । डेस्क: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में भारतीय रेलवे के कई स्टेशनों पर पीने के पानी और स्वच्छता की व्यवस्था को लेकर चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं. 512 नॉन-सबअर्बन ग्रेड स्टेशनों पर किए गए ऑडिट में पाया गया कि कई स्टेशनों के वाटर कूलरों से लिए गए पानी के नमूनों में E. coli बैक्टीरिया मौजूद था, जो डायरिया, फूड पॉइजनिंग और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर और पालक्काड जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला तथा पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलरों के पानी के सैंपल जांच में E. coli पॉजिटिव पाए गए.
वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान किए गए इस निरीक्षण में यह भी पाया गया कि 2022-23 में 49 स्टेशनों और 2023-24 में 56 स्टेशनों के प्लेटफॉर्म नल के पानी में टोटल कोलीफॉर्म्स बैक्टीरिया उपस्थित था. इसके अलावा स्टेशनों के शौचालयों और स्वच्छता की स्थिति भी काफी असंतोषजनक पाई गई.
रेलवे बोर्ड के 2018 के निर्देशों के तहत सभी स्टेशनों पर पेयजल, शौचालय, बैठने की जगह और फुट ओवर ब्रिज जैसी न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं (MEA) सुनिश्चित की जानी थीं. हालांकि, जांच किए गए 512 में से 458 स्टेशनों (89 प्रतिशत से अधिक) में इन सुविधाओं की भारी कमी देखी गई.
यहां तक कि CSMT, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे प्रमुख NSG-1 श्रेणी के स्टेशनों पर भी पेयजल नल, पंखे, वाटर कूलर, शौचालय और संकेतक बोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं में कमियां पाई गईं.
रिपोर्ट के अनुसार पूरे नेटवर्क में हजारों स्टेशनों पर शौचालयों, मूत्रालयों और पानी के नलों की भारी किल्लत है. इस स्थिति को देखते हुए CAG ने रेलवे को पानी की आपूर्ति प्रणालियों के नियमित निरीक्षण और एकीकृत पेयजल गुणवत्ता प्रोटोकॉल के तहत सभी मानकों की व्यापक जांच सुनिश्चित करने की सख्त सिफारिश की है.
गौरतलब है कि E. coli (एस्चेरिचिया कोलाई) एक प्रकार का बैक्टीरिया है, जो सामान्यतः मनुष्यों और जानवरों की आंतों में पाया जाता है. अधिकांश E. coli बैक्टीरिया हानिकारक नहीं होते और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. हालांकि, इसके कुछ संक्रामक स्ट्रेन दूषित पानी और भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाएं, तो यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं.
E. coli से होने वाली प्रमुख बीमारियां और समस्याएं-
1) फूड पॉइजनिंग और पेट का संक्रमण (Gastroenteritis): यह E. coli का सबसे आम प्रभाव है. दूषित पानी या असंतुलित/अस्वच्छ भोजन के सेवन से यह बैक्टीरिया आंतों को प्रभावित करता है. इसके लक्षणों में शामिल हैं:
तेज पेट दर्द और मरोड़ (Cramps), लगातार दस्त (Diarrhea) और कभी-कभी मल में खून आना (Dysentery), उल्टी (Vomiting) और जी मिचलाना, हल्का से तेज बुखार.
2) किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या (Hemolytic Uremic Syndrome - HUS): E. coli के कुछ खतरनाक स्ट्रेन (जैसे Shiga toxin-producing E. coli) से निकलने वाले टॉक्सिन (विष) लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं. इससे रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और किडनी फेलियर (Renal Failure) की स्थिति पैदा हो सकती है. यह स्थिति बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से जानलेवा साबित हो सकती है.
3) यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI): जब E. coli बैक्टीरिया आंतों से निकलकर मूत्र मार्ग (Urinary Tract) में प्रवेश कर जाता है, तो यह UTI का कारण बनता है. इसके मुख्य लक्षण हैं:
पेशाब में जलन या दर्द, बार-बार पेशाब आना, पेशाब का रंग मटैला या बदबूदार होना.
4) निमोनिया (Pneumonia): दुर्लभ मामलों में, विशेष रूप से कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों या अस्पतालों में भर्ती मरीजों में, यह बैक्टीरिया सांस की नली के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर निमोनिया का कारण बन सकता है.
5) सेप्टिसीमिया / ब्लड इंफेक्शन (Sepsis): यदि E. coli बैक्टीरिया शरीर के अन्य हिस्सों से होकर रक्त (Bloodstream) में फैल जाता है, तो यह सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है.
6) मेनिन्जाइटिस (Meningitis): नवजात शिशुओं (Newborns) में E. coli बैक्टीरिया मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आसपास की सुरक्षात्मक झिल्ली को संक्रमित कर मेनिन्जाइटिस का कारण बन सकता है.
बचाव के उपाय-
पीने के पानी की जांच और शुद्धिकरण (उबालकर या RO का पानी इस्तेमाल करें).
भोजन पकाने और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना.
कच्चे या अधपके मांस और अस्वच्छ दूध/डेयरी उत्पादों के सेवन से बचना.