बॉम्बे HC का निर्देश: अवैध प्रवासियों पर रोक के लिए आधार कानून में हो संशोधन
मुंबई । डेस्क: बॉम्बे हाईकोर्ट ने देश की सुरक्षा और अवैध प्रवासियों की समस्या से निपटने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. अदालत ने केंद्र सरकार और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को निर्देश दिया है कि वे 'आधार अधिनियम, 2016' में आवश्यक बदलावों पर विचार करें. इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को जल्द से जल्द ट्रैक करना और उन्हें वापस उनके देश भेजना है.
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि कई विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड हासिल कर रहे हैं. इस तरह के जाली पहचान पत्रों के जरिए वे न केवल अपनी वास्तविक पहचान छिपाते हैं, बल्कि देश की सुरक्षा, आव्रजन व्यवस्था और राष्ट्रीय प्रणालियों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं. कोर्ट के अनुसार, विभिन्न जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि फर्जी दस्तावेज हासिल करने के बाद ऐसे तत्व देश विरोधी गतिविधियों में भी शामिल पाए गए हैं.
जांच एजेंसियों और UIDAI के बीच समन्वय की कमी पर चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में मौजूद खामियों पर गहरी चिंता जताई. पीठ ने जोर देकर कहा कि अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए प्रवासियों को ट्रेस करने और उन्हें निष्कासित करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की सभी एजेंसियों को मिलकर प्राथमिकता के आधार पर काम करना होगा. कोर्ट ने टिप्पणी की कि समय की नजाकत को समझना बेहद जरूरी है और प्रशासनिक प्रक्रिया में होने वाली देरी का फायदा किसी भी घुसपैठिये को नहीं मिलना चाहिए.
मुंबई पुलिस की याचिका पर आया अदालत का आदेश
यह पूरा मामला मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया. पुलिस ने अदालत से मांग की थी कि वह UIDAI को एक संदिग्ध व्यक्ति, मजीद खान शाह हजरत शाह उर्फ मिराज ताहिर खान, द्वारा आधार कार्ड बनवाते समय जमा किए गए दस्तावेजों को उजागर करने का निर्देश दे.
राज्य सरकार के अनुसार, उक्त व्यक्ति एक अफगान नागरिक है जो 2018 तक के वैध वीजा पर भारत आया था और उसके बाद वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद अवैध रूप से भारत में रह रहा था. जब पुलिस ने UIDAI से दस्तावेज मांगे, तो प्राधिकरण ने आधार अधिनियम की धारा 29 का हवाला देते हुए व्यक्तिगत डेटा साझा करने से इनकार कर दिया था. UIDAI का कहना था कि कानून के मुताबिक बिना अदालती आदेश के ये दस्तावेज किसी जांच एजेंसी को नहीं दिए जा सकते.
मानव तस्करी और घुसपैठ से निपटने के लिए नियम बदलने की जरूरत
कानून की इसी सीमा को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि मानव तस्करी और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए आधार कानून में विशेष छूट या अलग प्रक्रियाओं का प्रावधान होना चाहिए. पीठ ने केंद्र सरकार के संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि वह कानून में ऐसे संशोधन करे, जिससे जांच एजेंसियों को फर्जी पहचान पत्र बनाने वालों, अवैध प्रवासियों और वापस घुसपैठ करने वाले तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिल सके.
आरोपियों के खिलाफ चार सप्ताह में निष्कासन कार्रवाई के सख्त निर्देश
अदालत ने मुंबई पुलिस और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मजीद खान शाह और अन्य सह-आरोपियों की नागरिकता तथा आव्रजन स्थिति की गहन जांच करें. इसके अलावा विदेशी अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और नागरिकता अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए.
हाईकोर्ट ने प्राधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर आरोपियों के खिलाफ निर्वासन (देपोर्टेशन) की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है. साथ ही, इन व्यक्तियों को ब्लैकलिस्ट करने, उनकी तस्वीरें सभी पुलिस स्टेशनों, संबंधित विभागों और सेवा प्रदाताओं को प्रसारित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उन्हें भारत में दोबारा प्रवेश करने या रहने से रोका जा सके. अदालत ने यह भी पता लगाने के आदेश दिए हैं कि फर्जी दस्तावेज किस प्रकार तैयार किए गए और इसमें कौन-कौन शामिल थे.