बिहार चुनाव- प. बंगाल SIR का प्रभाव महानगरों तक
नई दिल्ली । डेस्क: बिहार चुनाव का असर नई दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद तथा मुंबई जैसे महानगरों पर भी पड़ा है. वहां काम करने वाले, कामगारों की कमी महसूस की जा रही है. इसका कारण है कि बिहार से आने वाले कामगार वोट डालने के लिये अपने राज्य में चले गये हैं. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में SIR शुरू होने के कारण वहां के कामगार भी अपने राज्य चले गये हैं.
बिहार में शुरू हुए विधानसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल में 2026 की शुरुआत में होने वाले चुनावों के कारण दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में घरेलू सहायक, ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड, मॉल कर्मचारी और ऑफिस कर्मियों की अस्थायी कमी हो गई है. इसका सीधा असर इन बाजारों में दैनिक मजदूरी पर पड़ा है, जिसमें 10-12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार और पश्चिम बंगाल भारत के एंट्री-लेवल और अर्ध-कुशल कर्मचारियों के लिए लंबे समय से बड़े आपूर्ति केंद्र रहे हैं. बड़ी संख्या में ब्लू-कॉलर कर्मचारियों के अपने गृह राज्यों की ओर लौटने से मेट्रो शहरों में श्रमबल की किल्लत हो गई है. यह अनुपस्थिति मुख्य रूप से मतदान, मतदाता पंजीकरण और चुनावी माहौल से जुड़े अन्य कारणों से प्रेरित है, जैसा कि अपना (Apna) के सीईओ कार्तिक नारायण ने कहा. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में बेहतर नौकरियों और स्थानीय अवसरों का वादा किया गया है.
नारायण ने इस कमी को एक अस्थाई बताया है, लेकिन क्वेस (Quess) में कार्यबल प्रबंधन के अध्यक्ष लोहित भाटिया ने कहा कि इस बार बिहार चुनाव दिवाली और छठ पूजा के तुरंत बाद आया है, जिससे कई मतदाता लंबी छुट्टी (लगभग 21 दिन) ले रहे हैं. इस लंबी अवधि ने फ्रंटलाइन नौकरियों के लिए प्रवासी युवाओं की उपलब्धता को बुरी तरह प्रभावित किया है.
श्रमबल की कमी को देखते हुए, घरेलू और औद्योगिक दोनों तरह के नियोक्ता कर्मचारियों को रोके रखने और व्यापार निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उपस्थिति प्रोत्साहन, बोनस और अग्रिम भुगतान जैसी पेशकश कर रहे हैं. हालांकि, कुछ कर्मचारी शादी के सीजन तक अपने गृह नगरों में ही रुकने की योजना बना रहे हैं. भाटिया के अनुसार, इन राज्यों और ग्रामीण भारत में बढ़ते आर्थिक संकेतकों, बेहतर नौकरी के अवसरों और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के कारण युवाओं के वापस शहरी केंद्रों में लौटने की संभावना कम हो सकती है.
ब्लूप्रिंग (Bluspring) के सीईओ नितिन त्रिखा ने बताया कि मतदाता पंजीकरण और कल्याणकारी लाभों की चिंता के कारण भी कर्मचारी तेजी से बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों से अपने गृह नगरों की ओर जा रहे हैं. खासकर पिकर्स, पैकर्स, लोडर, गिग वर्कर्स और ड्राइवरों के लिए मांग काफी मजबूत बनी हुई है, जो पारंपरिक रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आते हैं.