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ईरान युद्ध-होर्मुज संकट के बीच 'बिग ऑयल' कंपनियों की चांदी

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04 अग. 2026, 06:35 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

Exxon Mobil
Exxon Mobil

वाशिंगटन । डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से पूरी दुनिया ऊर्जा संकट की आग में झुलस रही है. जहां एक ओर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है और आम जनता महंगाई की मार झेल रही है, वहीं दूसरी ओर दुनिया की दिग्गज तेल कंपनियां (Big Oil) इस युद्ध और मानवीय त्रासदी के बीच अभूतपूर्व मुनाफा कमा रही हैं. खाड़ी देशों से दूर बैठकर अपना कारोबार चलाने वाली ये बहुराष्ट्रीय कंपनियां वैश्विक अराजकता का फायदा उठाकर हर दिन अरबों डॉलर समेट रही हैं.


संकट से सजा तेल कंपनियों का खजाना


ईरान युद्ध के चलते लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक आपूर्ति बाधित हुई है. इस वैश्विक व्यवधान का सीधा फायदा एक्सॉनमोबिल, शेवरॉन, शेल, बीपी और टोटालएनर्जीज़ जैसी दिग्गज ऊर्जा कंपनियों को मिला है. अमेरिका की सबसे बड़ी तेल कंपनी एक्सॉनमोबिल ने चालू वर्ष की दूसरी तिमाही में 14.5 अरब डॉलर का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले चार वर्षों में इसका सबसे बेहतरीन तिमाही प्रदर्शन है. 


वहीं, अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी शेवरॉन ने 12 अरब डॉलर का शुद्ध लाभ कमाकर पिछले छह सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.


यूरोप की प्रमुख कंपनियों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है. ब्रिटेन-डच समूह शेल ने अपना मुनाफा दोगुना करते हुए लगभग 10 अरब डॉलर की कमाई की है, जिसे मजबूत एलएनजी (LNG) परिसंपत्तियों और महंगे कच्चे तेल का सहारा मिला. 


फ्रांस की टोटालएनर्जीज़ का मुनाफा 67 प्रतिशत उछलकर 3 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि ब्रिटिश कंपनी बीपी की कमाई भी दोगुना से अधिक बढ़कर 5.73 अरब डॉलर पर पहुंच गई. केवल पश्चिमी कंपनियां ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब की सरकारी कंपनी सऊदी अरामको का मुनाफा भी 44 फीसदी बढ़कर 32.69 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है.


कैसे ईंधन बनी युद्ध की आग?


अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की औसतन कीमतें हाल की तिमाहियों के मुकाबले अत्यधिक उच्च स्तर पर कारोबार कर रही हैं. बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जिन तेल उत्पादकों के निर्यात पर होर्मुज संकट का कोई सीधा असर नहीं पड़ा, उन्होंने वैश्विक कमी का भरपूर फायदा उठाया. दुनिया भर की रिफाइनरियों ने मध्य पूर्व के विकल्प के तौर पर अन्य स्रोतों से महंगा कच्चा तेल खरीदा, जिससे इन कंपनियों का अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.


वॉल स्ट्रीट के मानक सूचकांक एसएंडपी 500 में ऊर्जा क्षेत्र ने 135 प्रतिशत से अधिक की सालाना आय वृद्धि दर्ज की है, जो अन्य सभी क्षेत्रों की तुलना में सर्वाधिक है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जब कच्चे तेल की दरें बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियों की आय के मुकाबले उनका शुद्ध मुनाफा परिचालन दक्षता (operating leverage) और मार्जिन बढ़ने के कारण कहीं अधिक तेजी से बढ़ता है.


आम जनता पर दोहरी मार और मंदी का साया


एक तरफ जहां इन कंपनियों के शेयरधारक मालामाल हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं की जेबें खाली हो रही हैं. अमेरिका में पेट्रोल के दाम युद्ध-पूर्व स्तर से लगभग 40 प्रतिशत बढ़कर 4 डॉलर प्रति गैलन के पार जा पहुंचे हैं. 


ब्रिटेन में भी पेट्रोल और डीजल ऐतिहासिक उच्च स्तर पर बिक रहे हैं, जिससे परिवहन और दैनिक उपभोग की वस्तुएं बेहद महंगी हो गई हैं. वित्तीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज मार्ग जल्द नहीं खुला, तो ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देश गंभीर आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकते हैं.


डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख और कंपनियों को चेतावनी


तेल कंपनियों के इस रिकॉर्ड मुनाफे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गहरा रोष व्यक्त किया है. वाशिंगटन में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि वैश्विक कमी और संकट के नाम पर कंपनियां जनता का शोषण कर रही हैं. राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा कि एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन जैसी कंपनियों की अत्यधिक कमाई अनुचित है. 


उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि इन कंपनियों को अपने भारी-भरकम मुनाफे का एक हिस्सा आम जनता को लौटाना होगा और खुदरा कीमतों में तत्काल कटौती करनी होगी, अन्यथा सरकार को कड़े कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP