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CBI फ्रॉड का शिकार बेंगलुरु की बुजुर्ग महिला, गंवाएं 32 Cr

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17 नव. 2025, 06:21 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट

बेंगलुरु । डेस्क: बेंगलुरु की एक 57 वर्षीय महिला को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और DHL के नाम पर चला साइबर फ्रॉड का झांसा देकर ठगों ने करीब 6 महीने तक डिजिटल अरेस्ट में कैद रखा. निर्दोष साबित करने के नाम पर विभिन्न अकाउंट्स में बार-बार पैसे ट्रांसफर करने के बहाने महिला ने कुल 31.83 करोड़ रुपये गंवा दिए. घटना 2024 के अंत में शुरू हुई और इस साल मध्य में ठगों ने संपर्क तोड़ दिया. आखिरकार, 14 नवंबर को साइबर क्राइम शाखा में FIR दर्ज कराई गई है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और खोए पैसों की बरामदगी के प्रयास तेज हो गए हैं.


घटना की शुरुआत 15 सितंबर 2024 को हुई, जब महिला के पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया. कॉलर ने खुद को DHL का अधिकारी बताया और दावा किया कि मुंबई के अंधेरी से महिला के नाम पर एक पार्सल जब्त किया गया है. इसमें चार पासपोर्ट, तीन क्रेडिट कार्ड और प्रतिबंधित मादक द्रव्य होने का झूठा आरोप लगाया गया. इससे घबराई महिला को तुरंत एक फर्जी 'CBI अधिकारी' ने फोन किया और कहा कि उसे 'डिजिटल गिरफ्तारी' में लिया जा रहा है.


अधिकारी ने चेतावनी दी कि इस मामले में किसी को बताने या पुलिस के पास जाने पर 'हित में विपरीत' परिणाम होंगे. डर के मारे महिला ने यह बात मान ली. ठगों ने साफ कहा कि बचने का एकमात्र रास्ता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा जमा करना है. एक महीने के अंदर महिला ने अपनी बैंक डिपॉजिट और संपत्ति की सारी जानकारी ठगों को सौंप दी.


इसके बाद ठगों ने नया जाल बिछाया. उन्होंने कहा कि 'क्लीन चिट' पाने के लिए संपत्ति का 90 प्रतिशत अस्थायी रूप से जमा रखना होगा, साथ ही 2 करोड़ रुपये अतिरिक्त जमानत के तौर पर देने पड़ेंगे. वादा किया गया कि निर्दोष साबित होने पर फरवरी तक सारा पैसा लौटा दिया जाएगा. इस बहाने से अगले 6 महीनों में 187 अलग-अलग लेन-देन के जरिए कुल 31 करोड़ 83 लाख रुपये ठगों के अकाउंट्स में ट्रांसफर हो गए.


इस साल मध्य में अचानक ठगों ने सभी संपर्क काट दिए. तब जाकर महिला को फ्रॉड का अहसास हुआ. सदमे में वह साइबर क्राइम शाखा पहुंची, जहां 14 नवंबर को शिकायत दर्ज कराई गई.


साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की तुरंत जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम का एक क्लासिक उदाहरण है, जहां ठग सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को ब्लैकमेल करते हैं. खोए पैसों को ट्रेस करने के लिए बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच की जा रही है.


पुलिस ने जनता को सलाह दी है कि किसी अज्ञात कॉल पर घबराएं नहीं. अगर कोई सरकारी अधिकारी फोन पर पैसे मांगता है या 'डिजिटल गिरफ्तारी' का दावा करता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें. यह फ्रॉड पूरे देश में फैल रहा है, और जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा हथियार है. (Symbolic photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP