जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान- IMD
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि देश में जून की ऐतिहासिक सूखे जैसी स्थिति के बाद अब जुलाई महीने में भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. 1901 के बाद से इस साल का जून महीना पांचवां सबसे सूखा महीना दर्ज किया गया है, जिसके बाद जुलाई का यह पूर्वानुमान देश की कृषि और आर्थिक विकास दर को लेकर चिंताएं बढ़ाने वाला है.
मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, जुलाई में दीर्घकालिक औसत (LPA) की तुलना में केवल 94 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है. आमतौर पर जुलाई महीने के लिए एलपीए (LPA) बारिश लगभग 280.4 मिमी मानी जाती है.
मौसम विभाग ने बताया कि जुलाई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून कमजोर रह सकता है, हालांकि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है.
इस साल मानसून अपने तय समय से तीन दिन देरी से केरल पहुंचा था, जिसके बाद पश्चिमी कृषि क्षेत्रों में इसकी रफ्तार करीब दो हफ्तों तक थमी रही. इसके चलते जून महीने में सामान्य (165.3 मिमी) के मुकाबले सिर्फ 99.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो कि दीर्घकालिक औसत से 39.8 फीसदी कम है.
बारिश में आई इस भारी कमी की वजह से धान, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी मुख्य खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार काफी धीमी हो गई है. इसके साथ ही, देश के उत्तरी मैदानी इलाकों में जून में भीषण गर्मी का प्रकोप रहा, जहां कई क्षेत्रों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया था.
भारत की लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में मानसून बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि देश की सालाना बारिश का लगभग 70 फीसदी हिस्सा इसी सीजन से मिलता है.
भारत की लगभग आधी कृषि भूमि आज भी सिंचाई सुविधाओं से वंचित है और देश की करीब आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर खेती पर निर्भर है. ऐसे में लगातार दूसरे महीने मानसून की यह बेरुखी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ देश की विकास दर के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.