बस्तर बाढ़: स्कूली छात्राओं ने टूटे पुल को पार कर की कक्षा में वापसी
रायपुर । संवाददाता: बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों में 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद जीवन धीमा पड़ गया था. छोटे-छोटे पुल तेज धाराओं में बह गए थे. इस बीच, सोमवार को एक गांव की छोटी स्कूली छात्राओं का वीडियो सामने आया, जिसमें वे अपने स्कूल बैग कंधों पर लटकाए टूटे हुए पुल को पार कर कक्षा तक पहुंच रही थीं.
यह टूटा हुआ पुल अब मुश्किल से कुछ बांस की लकड़ियों और एक तार के सहारे बना हुआ है. तीसरी, छठी और सातवीं कक्षा की इन छात्राओं ने बताया कि स्कूल लगभग एक सप्ताह बाद फिर से खुले हैं, और उन्हें वहां पहुंचना ही था.
स्थानीय लोगों ने बताया कि बाढ़ ने छोटे पुलों को बहा दिया, घरों को तोड़ दिया और सड़कों को नुकसान पहुंचाया, जिससे शिक्षा और आंगनवाड़ी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. कई गांवों में कक्षाओं तक पहुंच बाधित हो गई है.
रेखा गांव के बच्चे आमतौर पर बरसूर-चित्रकूट सड़क पर बने एक पुल तक पहुंचने के लिए लगभग 2 किलोमीटर पैदल चलते हैं. पिछले सप्ताह की बाढ़ में इस पुल का एक सिरा बह गया था, जिसके बाद ग्रामीणों ने लकड़ी के तख्तों और बेकार पड़े बिजली के तार का उपयोग कर एक अस्थायी रास्ता बनाया.
अब 20 से अधिक बच्चे प्रतिदिन इस जोखिम भरे रास्ते का उपयोग करते हैं, जो लगभग 20 फीट की ऊंचाई से तेज, गंदले नाले के ऊपर से गुजरता है.
छात्राओं ने कहा कि जलस्तर अब कम होने लगा है, लेकिन यह रास्ता अभी भी खतरनाक लगता है. एक छात्रा ने कहा, "हमें डर लगता है, लेकिन हम स्कूल मिस नहीं करना चाहते."
खतरनाक रास्तों से गुजरने की इस स्थिति में स्थानीय लोगों का मानना है कि सुरक्षा रस्सियां या अस्थायी पैदल पुल स्थापित करना, परिवहन सहायता की व्यवस्था करना और पुलों की मरम्मत को प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि छात्राओं को अपनी पढ़ाई और सुरक्षा के बीच चयन न करना पड़े. (फोटो- प्रतीकात्मक)