बरूईपुर कांड: TMC ने लगाया 'सुपर इमरजेंसी' और नजरबंदी का आरोप
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरूईपुर में एक 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की झकझोर देने वाली घटना के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बरूईपुर दौरे से ठीक पहले कोलकाता में उनके आवास के बाहर भारी संख्या में केंद्रीय बलों और पुलिस प्रशासन को तैनात कर दिया गया, जिसे लेकर टीएमसी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
टीएमसी सांसदों और नेताओं ने इस सुरक्षा घेरेबंदी का कड़ा विरोध करते हुए केंद्र और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा है. टीएमसी सांसद डोला सेन ने इस कदम को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए कहा, "दीदी (ममता बनर्जी) एक जननेता हैं. बरूईपुर में हुई इस जघन्य घटना के बाद वह वहां जाना चाहती थीं, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनके घर को छावनी में बदल दिया. क्या वे उन्हें नजरबंद करना चाहते हैं? यह पूरी तरह से एक 'सुपर इमरजेंसी' जैसी स्थिति है."
वहीं, टीएमसी नेता मदन मित्रा ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह आरजी कर अस्पताल की घटना के लिए न्याय की मांग हो रही है, वैसी ही मांग बरूईपुर की घटना के लिए भी होनी चाहिए. जनता के अधिकारों को तानाशाही से नहीं दबाया जा सकता.
इस बीच, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा का वादा करने वाली भाजपा पूरी तरह नाकाम साबित हुई है.
अभिषेक बनर्जी ने लिखा कि बीजेपी के शासन में गंभीर अपराधों के आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने का माहौल बन गया है, जहां कानून के शासन से ज्यादा राजनीतिक रसूख की आवाज बुलंद है. उन्होंने घटना पर विपक्षी दलों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और इसे बेहद शर्मनाक बताया.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जादवपुर की सांसद सायोनी घोष ने जानकारी दी कि बरूईपुर मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन कर दिया गया है. फिलहाल, ममता बनर्जी के आवास के बाहर सुरक्षा बल मुस्तैद हैं और इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है.