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बांग्लादेश में खसरे से इस साल 86 बच्चों की मौत

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23 मई 2026, 07:29 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

खसरा
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ढाका । डेस्क: बांग्लादेश इस समय पिछले कुछ दशकों के सबसे गंभीर खसरे (Measles) के प्रकोप से जूझ रहा है. स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक देश में खसरे के पुष्ट संक्रमण के कारण कम से कम 86 बच्चों की जान जा चुकी है. इसके अलावा, लगभग 426 अन्य बच्चों में भी इस बीमारी के स्पष्ट लक्षण देखे गए हैं.


हाल के महीनों में यह संक्रामक बीमारी बेहद तेजी से फैली है, जिससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव आ गया है. विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और घनी आबादी वाले कम आय वाले शहरी क्षेत्रों में अस्पताल मरीजों से पूरी तरह भर चुके हैं. 


स्वास्थ्य महानिदेशालय (DGHS) के आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च से 23 मई के बीच देश भर में खसरे के 62,507 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 8,494 मामलों की प्रयोगशाला (लैब) में पुष्टि हो चुकी है.


स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे इस गंभीर संक्रमण और मृत्यु के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, खासकर वे बच्चे जिन्हें टीका नहीं लगा है या जिनका आंशिक रूप से टीकाकरण हुआ है. 


विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी पिछले महीने चेतावनी दी थी कि नियमित टीकाकरण कवरेज में आई कमी के कारण इस बड़े पैमाने के प्रकोप का खतरा बढ़ा है.


इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने छोटे बच्चों को लक्षित करते हुए आपातकालीन खसरा-रुबेला टीकाकरण अभियान का विस्तार किया है. सरकार के अनुसार, बीमारी की जटिलताओं को कम करने के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात की गई हैं, रोग निगरानी मजबूत की गई है और विटामिन-ए का वितरण बढ़ा दिया गया है. 


विशेषज्ञों का कहना है कि खसरा दुनिया की सबसे संक्रामक बीमारियों में से एक है, लेकिन वैक्सीन की दो खुराकों के जरिए इससे पूरी तरह बचा जा सकता है.


खसरा (Measles) एक बेहद संक्रामक और गंभीर श्वसन रोग है, जो 'मॉर्बिलाइवायरस' (Morbillivirus) नामक वायरस के संक्रमण से होता है. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके सीधे संपर्क में आने से हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलता है. 


संक्रमण होने पर पीड़ित को तेज बुखार, खांसी, बहती नाक, आंखों का लाल होना और दो-तीन दिनों बाद पूरे शरीर पर लाल चकत्ते (रैश) होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. यह वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे निमोनिया और दिमागी बुखार (एन्सेफलाइटिस) जैसी घातक जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है.


वैश्विक स्तर पर खसरे की मृत्यु दर (Mortality Rate) इसके प्रकोप और क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर निर्भर करती है. सामान्य तौर पर, कुल संक्रमित मामलों में से मृत्यु दर लगभग 0.1% से 0.3% के बीच होती है, यानी प्रति 1,000 मामलों में 1 से 3 बच्चों की मौत हो सकती है. 


हालांकि, कुपोषित बच्चों, विटामिन-ए की कमी से जूझ रहे शिशुओं और कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं वाले विकासशील या गरीब देशों में यह मृत्यु दर बढ़कर 5% से 10% तक पहुंच जाती है.


विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के कड़े मानकों के तहत जिन देशों ने लगातार तीन वर्षों तक अपने यहां खसरे के स्थानीय प्रसार (Endemic Transmission) को पूरी तरह रोक दिया है, उन्हें इससे मुक्त घोषित किया गया है. उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप के अधिकांश देशों, जैसे अमेरिका, कनाडा, चिली और ब्राजील ने वैक्सीन की उच्च कवरेज के जरिए इससे मुक्ति पा ली है. 


इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम (UK), जापान, दक्षिण कोरिया, मालदीव, श्रीलंका और भूटान जैसे कई अन्य देशों ने भी अपने यहां से खसरे के स्थानीय संचरण को समाप्त करने में सफलता हासिल की है. हालांकि, इन देशों में बाहर से आने वाले यात्रियों के जरिए कभी-कभी छिटपुट मामले जरूर सामने आते हैं.


इसके विपरीत, दुनिया के कई देशों में खसरा आज भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है. मुख्य रूप से अफ्रीकी और एशियाई देशों में, जहां नियमित टीकाकरण की दर कम है या स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा कमजोर है, इसके मामले लगातार आते रहते हैं. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC), नाइजीरिया, सोमालिया, इथियोपिया, चाड, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में खसरे का प्रकोप अक्सर देखा जाता है. 


इसके अलावा, युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, विस्थापन या वैक्सीन को लेकर फैले भ्रम के कारण यूरोपीय देशों के कुछ हिस्सों और कुछ अन्य विकसित देशों में भी समय-समय पर इसके नए मामले और बड़े प्रकोप देखने को मिलते रहते हैं.


बांग्लादेश की तुलना में भारत में खसरे (Measles) की स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में और बेहतर है, लेकिन देश को पूरी तरह जोखिम से बाहर नहीं कहा जा सकता. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और सीडीसी (CDC) के हालिया वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, भारत में भी समय-समय पर खसरे के मामले सामने आते रहते हैं और पिछले कुछ महीनों में देश के कुछ हिस्सों में मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP