बलरामपुर: पूर्व नक्सली कमांडर पुनर्वास के लिए दर-दर भटकने को मजबूर
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के फासले को बलरामपुर जिले की एक घटना ने उजागर कर दिया है. साल 2021 में हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए पूर्व नक्सली एरिया कमांडर सीताराम सोनवानी आज सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.
सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर पहुंचे सीताराम ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि आत्मसमर्पण के समय किए गए वादे अब तक अधूरे हैं.
ग्राम गम्हरिया निवासी सीताराम, जो कभी नक्सली संगठन में सक्रिय था, ने पुलिस प्रशासन के सामने इस उम्मीद में हथियार डाले थे कि उसे और उसके परिवार को बेहतर जीवन मिलेगा.
हालांकि, प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना के तहत स्वीकृत मकान उनके लिए राहत के बजाय मुसीबत का सबब बन गया है. मार्च 2025 में उनके नाम पर दो लाख रुपये के आवास की स्वीकृति तो मिली, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती ने उन्हें कर्ज के जाल में फंसा दिया.
सितंबर 2025 में पहली किश्त के रूप में महज 40 हजार रुपये जारी किए गए, जिसके बाद अगली किश्तें रोक दी गईं. मकान का काम पूरा करने के दबाव में सीताराम ने स्थानीय व्यापारियों से भारी ब्याज पर कर्ज ले लिया, लेकिन अब किश्तें न मिलने के कारण वे देनदारों के निशाने पर हैं.
आर्थिक तंगी का सीधा असर उनके बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ रहा है. सीताराम के मुताबिक, बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है.
पूर्व में पुलिस अधिकारियों द्वारा मिली व्यक्तिगत सहायता के बाद अब उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही है. जिले के उच्चाधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद समाधान न होने पर अब यह पूर्व कमांडर न्याय की उम्मीद में भटक रहा है.