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बालेन्द्र शाह की जीत बदल देगी नेपाल की राजनीति

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11 मार्च 2026, 06:04 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

बालेन्द्र शाह
बालेन्द्र शाह

नई दिल्ली । डेस्क: नेपाल के हालिया चुनावी नतीजों ने देश के दशकों पुराने राजनीतिक ढर्रे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, और इस महापरिवर्तन के केंद्र में 'बालेन फैक्टर' यानी बालेन्द्र शाह की अभूतपूर्व स्वीकार्यता है. काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी कार्यक्षमता सिद्ध करने के बाद, बालेन का राष्ट्रीय राजनीति में प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में उदय होना महज एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि नेपाल में 'पहचान की राजनीति' के अंत और 'समावेशी विकास' के युग की शुरुआत है. 


मधेस प्रदेश की 32 में से 30 सीटों पर बालेन्द्र शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) का कब्जा जमाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि अब मधेस की जनता ने क्षेत्रीय और जातीय सीमाओं को तोड़कर एक ऐसे नेतृत्व को चुना है, जो तराई, पहाड़ और हिमाल को एक सूत्र में पिरोने का माद्दा रखता है.


बालेन की यह जीत इसलिए भी क्रांतिकारी है क्योंकि इसने नेपाली कांग्रेस और मधेस-आधारित पारंपरिक दलों के उस एकाधिकार को समाप्त कर दिया है, जो दशकों से 'पहचान' और 'संघीयता' के नाम पर वोट मांगते रहे थे. उपेन्द्र यादव, सीके राउत और राजेंद्र महतो जैसे कद्दावर नेताओं की हार और उनकी पार्टियों के उम्मीदवारों की जमानत जब्त होना यह दर्शाता है कि जनता अब खोखले नारों के बजाय धरातल पर बदलाव चाहती है. 


बालेन शाह ने बड़ी चतुराई और संवेदनशीलता के साथ मधेस के आत्मसम्मान को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाया. जनकपुर की गलियों में मैथिली भाषा में संवाद करना और मधेस आंदोलन के प्रथम शहीद रमेश महतो को सम्मान देना, उनकी उस रणनीति का हिस्सा था जिसने मधेसी जनता को यह विश्वास दिलाया कि एक 'राष्ट्रीय पार्टी' भी उनकी अस्मिता की रक्षक हो सकती है.


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बालेन्द्र शाह ने नेपाल को 'उत्तर-पहचान राजनीति' (Post-Identity Politics) के दौर में धकेल दिया है. अब राजनीति का केंद्र बिंदु नागरिक अधिकार, सुशासन, रोजगार और बुनियादी ढांचा बन गया है. 


बालेन का यह वादा कि "मधेस के लोगों को अपने हक के लिए काठमांडू जाने की जरूरत नहीं, बल्कि अधिकार उनके दरवाजे पर आएंगे," सीधे आम आदमी के दिल में उतरा है. 


इससे पहले किसी भी नेता ने काठमांडू और मधेस के बीच के मानसिक फासले को इतनी सहजता से नहीं पाटा था. 


बालेन की बढ़ती लोकप्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नेपाल की आने वाली राजनीति अब पुराने सिंडिकेट के हाथों में नहीं, बल्कि उन युवाओं के हाथों में होगी जो सेवा वितरण (Service Delivery) को ही असली राजनीति मानते हैं. यह जीत न केवल मधेस की दिशा बदलेगी, बल्कि आने वाले समय में काठमांडू की सत्ता संरचना में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव लाने वाली है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP