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अज़रबैजान: स्कूलों में हिजाब पर अप्रत्यक्ष प्रतिबंध से विवाद, विरोध प्रदर्शन तेज

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12 अक्टू. 2026, 07:37 PM 3 मिनट में पढ़ें 9

हिजाब
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नई दिल्ली । डेस्क: अज़रबैजान सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में हिजाब और धार्मिक पहनावे पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंध लगाने के फैसले ने देश में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है. सरकार ने 'शिक्षा संस्थानों के लिए पोशाक नियमों' में संशोधन करते हुए केवल धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के अनुकूल वस्त्र पहनने का आदेश दिया है. इस संशोधन में स्पष्ट रूप से हिजाब का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन नए नियमों के लागू होते ही हिजाब पहनने वाली छात्राओं और शिक्षिकाओं को परिसरों में प्रवेश करने से रोका जाने लगा है.


शिक्षिकाओं और छात्राओं में भारी निराशा


स्कूलों में छात्राओं और महिला शिक्षकों को मुख्य द्वार से ही वापस लौटाया जा रहा है. एक स्थानीय शिक्षिका ज़हरा हसनोवा ने इस फैसले पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पोशाक चुनना उनका व्यक्तिगत अधिकार है. हिजाब पहनने के कारण कई छात्राओं और शिक्षिकाओं को कक्षाओं से बाहर कर दिया गया है, जिससे छात्रों में आक्रोश व्याप्त है. कुछ क्षेत्रों में विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया है, जबकि सोशल मीडिया पर विदाई और विरोध के भावुक वीडियो सामने आ रहे हैं.

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जेल में बंद पत्रकार की भूख हड़ताल और इंटरनेट ब्लैकआउट की अफवाहें


प्रतिबंध के खिलाफ आक्रोश केवल सड़कों तक सीमित नहीं है. वर्ष 2020 से जेल में बंद पत्रकार पोलैड असलानोव ने इस नीति को संवैधानिक अधिकारों का हनन बताते हुए जेल के भीतर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है. इस बीच, विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि साइबर निगरानी संस्थाओं ने आधिकारिक तौर पर इंटरनेट ब्लैकआउट की पुष्टि नहीं की है.


तुर्की में विरोध और कूटनीतिक तनाव की आहट


इस फैसले का असर पड़ोसी देश तुर्की में भी देखने को मिल रहा है. इस्तांबुल स्थित अज़रबैजानी दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों ने बाकू सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की. तुर्की के प्रदर्शनकारियों ने इस घटनाक्रम की तुलना 1997 के 'पोस्ट-मॉडर्न तख्तापलट' से की है, जब तुर्की में भी हिजाब पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.


विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने अपनी पार्टी के सम्मेलन में कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि कोई भी उनके देश की जीवनशैली और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे. माना जा रहा है कि अलीयेव का यह बयान तुर्की के प्रति एक परोक्ष संकेत था.


धर्मनिरपेक्षता बनाम धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा


अज़रबैजान की लगभग 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है और देश का संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है. वहीं, शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली शिक्षा परिषद का तर्क है कि नई यूनिफॉर्म नीति से यूनिफॉर्मिटी आएगी, पेशेवर मानकों का पालन होगा और सरकारी स्कूलों की साख मजबूत होगी. परिषद के अनुसार, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मूल्यों वाले वस्त्र केवल विशेष आयोजनों पर ही पहने जा सकेंगे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP