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विधानसभा चुनावों ने तेल की कीमतों पर लगाया 'ब्रेक'

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15 मार्च 2026, 03:27 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

पेट्रोल-डीजल
पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, लेकिन भारत में आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं. पिछले दो हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. 


जानकारों और सरकारी सूत्रों के अनुसार, तकनीकी रूप से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कम से कम 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होनी चाहिए, लेकिन आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल इस बोझ को जनता पर डालने के पक्ष में नहीं दिख रही हैं.


पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों ने तेल की कीमतों पर 'ब्रेक' लगा दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल, जो इजरायल और ईरान के बीच तनाव से पहले 73 डॉलर प्रति बैरल पर था, अब बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. 


आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल में प्रति डॉलर की वृद्धि का सीधा असर घरेलू बाजार में पेट्रोल पर 55 पैसे और डीजल पर 52 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी के रूप में दिखता है. इस गणना के आधार पर तेल की कीमतों में 15 रुपये से अधिक का इजाफा होना चाहिए था, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि मतदान संपन्न होने तक कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव की संभावना कम है.


हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों ने रसोई गैस (एलपीजी) के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की है, लेकिन पेट्रोल-डीजल को इससे बाहर रखा गया है. 


सरकार को डर है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि से न केवल परिवहन महंगा होगा, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आएगा, जिससे महंगाई अनियंत्रित हो सकती है. 


चुनाव के समय महंगाई का मुद्दा विपक्ष को सरकार के खिलाफ बड़ा हथियार दे सकता है. 


यदि सरकार तेल कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए कीमतों में वृद्धि की अनुमति नहीं देती है, तो इसका सीधा असर सरकारी लाभांश पर पड़ेगा या फिर सरकार को टैक्स कम करके जनता को राहत देनी होगी. 


दोनों ही स्थितियों में सरकारी खजाने पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है. फिलहाल, जनता की निगाहें चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तारीखों के एलान के बाद होने वाले आर्थिक फैसलों पर टिकी हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP