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क्या एक ही व्यक्ति की उंगलियों के निशान आपस में मिलते हैं?

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30 दिस. 2025, 09:08 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

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नई दिल्ली । डेस्क: अब तक यह माना जाता रहा है कि दुनिया में दो व्यक्तियों के उंगलियों के निशान कभी एक जैसे नहीं होते. यहां तक कि किसी एक व्यक्ति की दसों उंगलियों के निशान भी पूरी तरह अलग होते हैं. फॉरेंसिक विज्ञान की यह बुनियादी मान्यता दशकों से अपराध जांच की रीढ़ रही है. लेकिन अमेरिका के वैज्ञानिकों की एक नई शोध ने इस धारणा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.


कोलंबिया विश्वविद्यालय और बफेलो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन में दावा किया गया है कि एक ही व्यक्ति की अलग-अलग उंगलियों के निशानों में भी उल्लेखनीय समानताएं हो सकती हैं. यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘साइंस एडवांसेस’ में प्रकाशित हुई है और इसे फॉरेंसिक जांच के क्षेत्र में संभावित रूप से अहम माना जा रहा है.


शोध के लिए वैज्ञानिकों ने 60 हजार से अधिक उंगलियों के निशानों का विश्लेषण किया. इसके बाद एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित टूल की मदद से इन फिंगरप्रिंट्स की जांच की गई. नतीजों में सामने आया कि भले ही हर उंगली का निशान अलग हो, लेकिन एक ही व्यक्ति की अलग-अलग उंगलियों के निशानों के पैटर्न में काफी हद तक समानता पाई जा सकती है.


परंपरागत फॉरेंसिक पद्धति में उंगलियों के निशानों की बेहद सूक्ष्म विशेषताओं पर ध्यान दिया जाता है, जैसे रेखाओं का टूटना, मिलना या समाप्त होना. इसके विपरीत, इस एआई आधारित अध्ययन में उंगलियों के निशानों की समग्र बनावट पर जोर दिया गया. वैज्ञानिकों ने देखा कि रेखाएं किस दिशा में मुड़ती हैं, उनका झुकाव कैसा है और उनका समग्र प्रवाह क्या दर्शाता है. इसी आधार पर समानताएं पहचानी गईं.


शोधकर्ताओं के अनुसार, यह एआई तकनीक 75 से 90 प्रतिशत मामलों में सही तरीके से यह पहचानने में सक्षम रही कि अलग-अलग उंगलियों के निशान एक ही व्यक्ति के हैं या नहीं. हालांकि वैज्ञानिक यह भी स्वीकार करते हैं कि एआई यह निर्णय किस आधार पर ले रही है, इसे पूरी तरह समझा नहीं जा सका है.


कोलंबिया विश्वविद्यालय के रोबोटिक्स विशेषज्ञ और इस शोध के प्रमुख प्रोफेसर होड लिपसन का कहना है कि इस तकनीक को लेकर अभी और गहन अध्ययन की जरूरत है. उनके मुताबिक, एआई पूरी तरह स्वचालित नहीं है और इसे पहले से प्रशिक्षित किया जाता है, उसी प्रशिक्षण के आधार पर यह काम करती है.


वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नई पद्धति अपराध जांच में खास तौर पर उपयोगी हो सकती है, जहां अपराध स्थल से अधूरे या कई अलग-अलग उंगलियों के निशान मिलते हैं. एक प्रयोग में एआई ने 1000 संदिग्धों की सूची को घटाकर सिर्फ 40 तक सीमित कर दिया, जिससे जांच प्रक्रिया तेज हो सकती है.


हालांकि, विशेषज्ञों का एक वर्ग इस शोध को बहुत बड़ा बदलाव मानने से इनकार करता है. ब्रिटेन के हुल विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक विशेषज्ञ प्रोफेसर ग्राहम विलियम्स के अनुसार, यह कभी भी पूरी तरह साबित नहीं किया गया कि उंगलियों के निशानों में कोई समानता हो ही नहीं सकती. उनके मुताबिक, अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जहां दो अलग-अलग व्यक्तियों के उंगलियों के निशान बिल्कुल एक जैसे पाए गए हों.


फिलहाल, वैज्ञानिक भी मानते हैं कि यह तकनीक अदालत में सबूत के रूप में इस्तेमाल के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन अपराध जांच और संदिग्धों की पहचान में यह एक सहायक औजार साबित हो सकती है. (Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP