सेना की शिकायत और प्रशासन की अनदेखी, हाईकोर्ट में सुनवाई
बिलासपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में चकराभाटा एयरपोर्ट से नजदीक सेना की जमीन से अवैध रूप से मुरूम निकालकर बेचने के मामले में हाईकोर्ट ने दो सप्ताह बाद अगली सुनवाई की मियाद तय की है.
दरअसल राज्य सरकार ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुरुम के सैंपल की जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए समय की मांग की थी.
इस मामले पर सेना की तरफ से कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए यह बताया गया कि चकराभाटा एयरपोर्ट के विकास के लिए राज्य सरकार को आर्मी की जमीन सौंपने की प्रक्रिया के दौरान अवैध मुरुम खुदाई की जानकारी मिली थी.
सेना ने इस बारे में जिला प्रशासन और पुलिस को कई बार जानकारी दी.
अतिक्रमण और अवैध खनन रोकने के साथ ही जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की, इसके बावजूद खनन नहीं रुका.
चकराभाटा एयरपोर्ट के पास रक्षा मंत्रालय की जमीन से लगभग 50 लाख घन मीटर मुरूम अवैध रूप से निकाली गई है, उससे सरकार को रॉयल्टी में 25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
इस मुरूम का उपयोग परसदा और आसपास की कॉलोनियों की सड़कों के निर्माण में किया गया है. इसको लेकर मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हाईकोर्ट ने संज्ञान में लिया था.
इसके बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए सुनवाई शुरू की थी. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, रक्षा मंत्रालय और कॉलोनी संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
नोटिस के जवाब में सेना की तरफ से कर्नल अनुपम श्रीमाली ने हलफनामा प्रस्तुत किया है. इसके अनुसार 9 अप्रैल 2024 को सेना द्वारा प्रशासन को पत्र लिखकर इस बारे में अवगत कराया गया था.
इसके अलावा 16 अप्रैल 2024 को मुख्यालय छत्तीसगढ़ और ओडिशा उपक्षेत्र के कमांडर ने एयरपोर्ट और चकराभाटा में आर्मी की जमीन का निरीक्षण किया था.
इस दौरान आर्मी की जमीन की सुरक्षा, अतिक्रमण और अवैध खनन पर चर्चा हुई. सेना ने राजस्व अधिकारियों और पुलिस से अवैध गतिविधियों को रोकने की अपील की.
इस संबंध में 30 अप्रैल को पत्र भी लिखा गया. इसके बाद 13 दिसंबर 2024 को कलेक्टोरेट बिलासपुर में बैठक हुई.
इस बैठक में सेना की तरफ से कलेक्टर को सभी अवैध गतिविधियों को रोकने और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने को कहा गया.
ये सभी दस्तावेज सेना की तरफ से कोर्ट में पेश किये गये.