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अमेरिका-ईरान युद्ध में हथियार कंपनियों की चांदी

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09 मार्च 2026, 03:20 PM 6 मिनट में पढ़ें 2

ईरान युद्ध
ईरान युद्ध

वाशिंगटन । डेस्क: वाशिंगटन डीसी के गलियारों से लेकर अरब सागर के लहरों तक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष आम जनमानस के लिए चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े रक्षा ठेकेदारों के लिए यह "स्वर्ण युग" की शुरुआत जैसा है. हाल ही में व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि आने वाले समय में युद्ध का यह कारोबार और भी अधिक फले-फूलेगा. 


इस बैठक में आरटीएक्स (पूर्व में रेथियॉन), लॉकहीड मार्टिन, बोइंग, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन, बीएई सिस्टम्स, एल3हैरिस और हनीवेल एयरोस्पेस जैसी कंपनियों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया. राष्ट्रपति ट्रंप ने इन कंपनियों को "एक्सक्विजिट क्लास" यानी अति-विशिष्ट श्रेणी के हथियारों के उत्पादन में चार गुना वृद्धि करने का स्पष्ट निर्देश दिया है. यह आदेश महज एक सैन्य रणनीति नहीं है, बल्कि एक विशाल आर्थिक चक्र को गति देने वाला कदम है. 

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अमेरिका का रक्षा बजट, जो 2025 में पहले से ही रिकॉर्ड 1 ट्रिलियन डॉलर के करीब है, उसे ट्रंप प्रशासन 2027 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की योजना बना रहा है. इस भारी भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं निजी कंपनियों की तिजोरियों में जाएगा, जो पहले से ही अरबों डॉलर के ऑर्डर बैकलॉग पर बैठी हैं. कई रक्षा कंपनियों का कार्यभार और उनकी संपत्ति दुनिया के कई छोटे देशों के सकल घरेलू उत्पाद से भी कहीं अधिक है, जो यह दर्शाता है कि आधुनिक भू-राजनीति में इन हथियार निर्माताओं का प्रभाव कितना गहरा है.


ईरान के खिलाफ जारी "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" ने इन कंपनियों के लिए अपनी घातक प्रदर्शनियों का एक वैश्विक मंच तैयार कर दिया है. पिछले कुछ हफ्तों में ही अमेरिकी रक्षा कंपनियों के शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया है. 


नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन के शेयरों में 5 प्रतिशत, आरटीएक्स में 4.5 प्रतिशत और लॉकहीड मार्टिन में 3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. यह बढ़ोत्तरी सीधे तौर पर ईरान के साथ छिड़े संघर्ष और वहां इस्तेमाल हो रहे गोला-बारूद की खपत से जुड़ी है. 


अमेरिकी मध्य कमान के अनुसार, इस युद्ध में 20 से अधिक विशिष्ट हथियार प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है. आरटीएक्स द्वारा निर्मित टोमहॉक मिसाइलें, जो पिछले तीन दशकों से पेंटागन का मुख्य हथियार रही हैं, एक बार फिर अरब सागर में तैनात अर्ली बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर्स से गरज रही हैं. प्रत्येक डिस्ट्रॉयर 90 से अधिक टोमहॉक ले जाने में सक्षम है, और जितनी अधिक मिसाइलें दागी जा रही हैं, आरटीएक्स के लिए नए ऑर्डर की उतनी ही अधिक संभावना पैदा हो रही है. 


इसी तरह, लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित 'प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल' (PrSM) का पहली बार युद्ध के मैदान में सफल परीक्षण किया गया है. 400 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल हिमार्स (HIMARS) सिस्टम से दागी जा रही है, जो आधुनिक युद्धकला में इन कंपनियों के तकनीकी प्रभुत्व को साबित करती है.


इस युद्ध ने न केवल आक्रामक हथियारों बल्कि रक्षात्मक प्रणालियों की मांग को भी चरम पर पहुंचा दिया है. ईरान के जवाबी हमलों को रोकने के लिए तैनात पैट्रियट मिसाइल बैटरियां और थाड (THAAD) सिस्टम लॉकहीड मार्टिन और आरटीएक्स के लिए निरंतर राजस्व का स्रोत बने हुए हैं. जहां पैट्रियट मिसाइलें कम ऊंचाई वाले खतरों को संभालती हैं, वहीं थाड प्रणाली अंतरिक्ष की सीमाओं पर बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करती है. 


हवाई क्षेत्र में बोइंग के बी-1 बॉम्बर्स, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन के बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स और लॉकहीड के एफ-35 और एफ-22 रैप्टर जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का दबदबा है. ये विमान ईरान के भूमिगत बंकरों को नष्ट करने के लिए 900 किलोग्राम के जो भारी बम गिरा रहे हैं, उनका निर्माण और रखरखाव रक्षा कंपनियों के लिए मुनाफे की गारंटी है. 


इसके अलावा, युद्ध के मैदान में निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए उपयोग किए जा रहे ई-3 सेंट्री अवाक्स, पी-8ए पोसिडोन और आरसी-135 जासूसी विमानों का जाल बिछाया गया है, जिनके निर्माण में बोइंग और एल3हैरिस जैसी कंपनियों ने महारत हासिल की है. यह पूरा सैन्य ढांचा एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र की तरह काम कर रहा है जहां संघर्ष जितना लंबा खिंचेगा, इन कंपनियों का मुनाफा उतना ही बढ़ता जाएगा.


युद्ध के इस बदलते स्वरूप में लागत कम करने और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए अब "लुकस" (LUCAS) जैसे सस्ते और 'वन-वे' ड्रोन का भी पदार्पण हुआ है. स्पेक्ट्रेवर्क्स द्वारा निर्मित यह ड्रोन महज 35,000 डॉलर का है, जो जनरल एटॉमिक्स के 40 मिलियन डॉलर वाले महंगे एमक्यू-9 रीपर ड्रोन का एक किफायती विकल्प बनकर उभरा है. हालांकि महंगे रीपर ड्रोन का अपना महत्व है, लेकिन लुकस जैसे ड्रोनों का बड़े पैमाने पर उत्पादन हथियार कंपनियों के लिए एक नया और बड़ा बाजार खोल रहा है. 


समुद्र में तैनात अमेरिकी नौसेना के बेड़े की बात करें तो हंटिंगटन इंगल्स इंडस्ट्रीज द्वारा निर्मित यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड जैसे विमानवाहक पोत अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं. ये विशाल पोत न केवल युद्धपोत हैं, बल्कि चलते-फिरते सैन्य औद्योगिक परिसर हैं जो हजारों करोड़ों डॉलर के निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं. 


सिपरी (SIPRI) की हालिया रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है कि दुनिया की शीर्ष 100 रक्षा कंपनियों में अमेरिकी फर्मों का दबदबा है, जिन्होंने 2024 में 334 अरब डॉलर का राजस्व केवल रक्षा क्षेत्र से कमाया है.


इजरायल की रक्षा कंपनियाँ भी इस क्षेत्रीय अस्थिरता से अछूती नहीं हैं. एलबिट सिस्टम्स, इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और राफेल जैसी कंपनियाँ, जो अपनी उन्नत ड्रोन और मिसाइल रक्षा तकनीकों के लिए जानी जाती हैं, इस युद्ध के चलते अपने निर्यात में भारी उछाल देख रही हैं. 


राफेल द्वारा निर्मित 'आयरन डोम' की सफलता ने इसे वैश्विक बाजार में एक ब्रांड बना दिया है. वैश्विक स्तर पर रक्षा खर्च में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि होकर 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि दुनिया एक नए शीत युद्ध या शायद उससे भी बड़े संकट की ओर बढ़ रही है, जिसमें हथियार निर्माता सबसे बड़े लाभार्थी हैं. 


नाटो देशों द्वारा अपनी जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करने का संकल्प इन कंपनियों के भविष्य को अगले कई दशकों तक सुरक्षित कर चुका है. 


मार्च 2023 से मार्च 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि आरटीएक्स के शेयरों में 110 प्रतिशत की रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि हुई है, जो किसी भी अन्य क्षेत्र के मुकाबले कहीं अधिक है. 


अंततः, अमेरिका-ईरान युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कूटनीति विफल हो या सफल, लेकिन रक्षा उद्योग के लिए यह संघर्ष केवल व्यापार के विस्तार और मुनाफे को चौगुना करने का एक सुनहरा अवसर है, जहां हर दागी गई मिसाइल और हर उड़ता हुआ लड़ाकू विमान शेयरधारकों की संपत्ति में इजाफा कर रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP