'ऑलवेज-ऑन' सैटेलाइट लोकेशन ट्रैकिंग के विरोध में एमनेस्टी इंटरनेशनल
नई दिल्ली । डेस्क: अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत सरकार के एक दूरसंचार उद्योग प्रस्ताव की समीक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है. जिसमें बेहतर कानूनी निगरानी के लिए फ़ोनों पर 'ऑलवेज-ऑन' सैटेलाइट लोकेशन ट्रैकिंग अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है. एमनेस्टी का कहना है कि यह कदम मानवाधिकार रक्षकों के डेटा को खतरे में डाल सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार लंबे समय से दूरसंचार कंपनियों पर जांच के दायरे में आने वाले व्यक्तियों की अधिक सटीक लोकेशन प्रदान करने का दबाव डाल रही है. दूरसंचार ऑपरेटरों ने इसके जवाब में सरकार को सुझाव दिया है कि स्मार्टफोन निर्माताओं को फ़ोनों पर लोकेशन ट्रैकिंग को स्थायी रूप से सक्षम करने का आदेश दिया जाए. रॉयटर्स ने शुक्रवार को बताया कि सरकार इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है.
गोपनीयता और सुरक्षा चिंताओं के कारण प्रमुख स्मार्टफोन कंपनियां Apple, Google और Samsung निजी तौर पर इन चर्चाओं का विरोध कर रही हैं.
रॉयटर्स को दिए एक बयान में, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि लोकेशन डेटा "अविश्वसनीय रूप से गोपनीय" हो सकता है और यह व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक संपर्कों को उजागर कर सकता है, जैसे कि पत्रकारों या मानवाधिकार समूहों से मिलने वाले गोपनीय स्रोत.
एमनेस्टी ने कहा, "यह बेहद चिंताजनक है. ऐसे समय में जब निगरानी घोटाले एक बढ़ते हुए वैश्विक खतरे हैं, सरकारों को अपनी कार्यप्रणाली और सुरक्षा उपायों में सुधार करने पर काम करना चाहिए, न कि लोगों को और भी अधिक संवेदनशील डेटा प्रकट करने के लिए मजबूर करना चाहिए."
इस योजना की समीक्षा कर रहे भारत के आईटी और गृह मंत्रालयों ने इस प्रतिक्रिया पर टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया.
एमनेस्टी ने अतीत में भी भारत की निगरानी प्रथाओं की निंदा की है, जिसमें पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए कथित तौर पर पेगासस स्पाइवेयर के इस्तेमाल के आरोप शामिल हैं - हालांकि मोदी सरकार ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है.
पिछले सप्ताह भारत में एक भयंकर गोपनीयता बहस तब छिड़ गई थी, जब रॉयटर्स ने सबसे पहले सरकार के एक अन्य गोपनीय निर्देश की खबर दी थी, जिसमें सभी स्मार्टफोनों पर एक सरकारी साइबर सुरक्षा ऐप को प्रीलोड करने की बात कही गई थी. जासूसी की आशंकाओं पर कार्यकर्ताओं और राजनेताओं के विरोध के बाद भारत सरकार को वह आदेश वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
फ़ोन लोकेशन ट्रैक करने के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, "हम भारत को 'निगरानी राज्य' में क्यों बदलना चाहते हैं?" बड़ी संख्या में भारतीय उपयोगकर्ताओं ने सुरजेवाला और अन्य गोपनीयता कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर इस योजना की निंदा की, जिसमें एक उपयोगकर्ता ने इसे फ़ोनों को "डिजिटल एंकल मॉनिटर" में बदलने जैसा बताया.