शुक्र, 16 अक्टू. 2026

CGKhabar

छत्तीसगढ़ की बेटी अमिता श्रीवास ने माउंट एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

C

CG Khabar

13 सित. 2026, 01:35 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

 अमिता श्रीवास
अमिता श्रीवास

जांजगीर । संवाददाता: जांजगीर-चांपा जिले के एक छोटे से इलाके लोहारपारा (चांपा) की रहने वाली अमिता श्रीवास ने अपनी अटूट इच्छाशक्ति और संघर्ष के दम पर इतिहास रच दिया है. एक मामूली सैलून चलाने वाले जैतराम श्रीवास की पुत्री अमिता ने विपरीत परिस्थितियों और गंभीर वित्तीय चुनौतियों को पछाड़ते हुए दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया है. 


22 मई 2026 को इस दुर्गम शिखर को फतेह करने के बाद वे सुरक्षित नीचे लौट आई हैं, जिसे पर्वतारोहण की दुनिया में एक पूर्ण और सफल अभियान माना जाता है.


एक साधारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए अमिता ने वर्ष 2018 में पर्वतारोहण का बेसिक कोर्स किया और बाद में सिक्किम से एडवांस ट्रेनिंग पूरी की. संसाधनों की कमी का आलम यह था कि वे तड़के नंगे पांव अभ्यास किया करती थीं. 


उनकी लगन को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य पावर जनरेशन कंपनी और राज्य सरकार ने उनके इस खर्चीले अभियान के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की. इससे पहले अमिता 8 मार्च 2021 को अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर भी तिरंगा फहराकर राज्य की पहली महिला अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही बनने का गौरव हासिल कर चुकी हैं.


माउंट एवरेस्ट का यह सफर बेहद जोखिम भरा और दर्दनाक रहा. 9 अप्रैल को शुरू हुए इस अभियान में 6,500 मीटर की ऊंचाई पर खराब मौसम, बर्फीली हवाओं और कम ऑक्सीजन ने राह रोकी. चढ़ाई के दौरान उनकी टीम के दो साथियों की जान भी चली गई. 


इसके बावजूद अपने शेरपा दावा ग्यालजिन के सहयोग से अमिता आगे बढ़ती रहीं और 21 घंटे की लगातार चढ़ाई के बाद शिखर पर पहुंचीं. वापसी का सफर और अधिक खतरनाक साबित हुआ, जहां ऑक्सीजन की भारी कमी और फ्रॉस्टबाइट से जूझते हुए 42 दिनों के कठिन संघर्ष के बाद वे बेस कैंप पहुंचीं, जिसके बाद उन्हें काठमांडू में इलाज के लिए भर्ती कराया गया. 


अमिता की यह ऐतिहासिक सफलता आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP