अमेरिका अब भरोसे करने लायक नहीं रहा- ईरानी राष्ट्रपति
तेहरान/न्यूयार्क । डेस्क: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका के साथ जारी कूटनीतिक वार्ताओं को लेकर अत्यंत सख्त और निराशाजनक रुख अपनाया है. अल जजीरा को दिए एक विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने साफ तौर पर कहा कि ईरान को अब अमेरिकी पक्ष पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि अतीत में जब भी दोनों देशों के बीच किसी सहमति या वार्ता की रूपरेखा बनी, उसके तुरंत बाद अमेरिका की तरफ से नए प्रतिबंध और सैन्य हमले किए गए.
यह बयान ऐसे समय आया है जब तेहरान ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान वाशिंगटन को युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सात दिनों का एक त्वरित प्रस्ताव प्रस्तुत किया है और अब उस पर अमेरिकी प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.
सात-दिवसीय शांति योजना और होर्मुज जलडमरूमध्य का गतिरोध
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा रेखांकित की गई योजना के अनुसार, यदि अमेरिका सहमति व्यक्त करता है तो शुरुआती चार-पांच दिनों में अमेरिका को अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी, ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित करना होगा, लगभग 12 अरब डॉलर की फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति को बहाल करना होगा और पूरे क्षेत्र में युद्धविराम लागू करना होगा.
इसके बदले में, छठे दिन ईरान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोल देगा और सातवें दिन दोनों देश परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर अंतिम समझौते के लिए सीधी वार्ता शुरू करेंगे.
पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट किया कि कतर और पाकिस्तान इस संदेश को मध्यस्थ के रूप में अमेरिका तक पहुंचा रहे हैं. यह पूरी रूपरेखा जून में बने पिछले सहमति पत्र (MoU) पर आधारित है, जिस पर अमेरिका को अपना रुख स्पष्ट करना अनिवार्य है.
अमेरिका को ठहराया आक्रामक, जलडमरूमध्य बंद करने को बताया स्वाभाविक प्रतिक्रिया
युद्ध की शुरुआत के संदर्भ में बोलते हुए ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका और इजरायल को इस क्षेत्र में बढ़ती हिंसा का मुख्य जिम्मेदार ठहराया. पेज़ेश्कियान ने इस बात का खंडन किया कि ईरान ने स्वेच्छा से होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध किया है. उन्होंने कहा कि जब अमेरिका ने ईरान के सभी व्यापारिक रास्ते बंद कर दिए, तो जलमार्ग को बाधित करना एक 'स्वाभाविक प्रतिक्रिया' थी.
उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने पिछले 200 वर्षों में किसी भी देश पर पहले हमला नहीं किया है और तेहरान अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ही अपनी संप्रभुता की रक्षा कर रहा है.
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बाहरी हस्तक्षेप खारिज, यमन संघर्ष पर रुख साफ
पश्चिम एशिया में सुरक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि इस क्षेत्र को किसी 'बाहरी पुलिसकर्मी' या विदेशी ताकत की आवश्यकता नहीं है. क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी सहयोग और संवाद से ही शांति संभव है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल मुस्लिम देशों को आपस में लड़ाकर क्षेत्र के संसाधनों पर कब्जा जमाना चाहते हैं.
यमन में हुथी विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़े तनाव पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हुथी गुट की सैन्य कार्रवाइयों से तेहरान का कोई सीधा संबंध नहीं है. उन्होंने सऊदी अरब और हुथी पक्ष दोनों से अपील की कि वे भाईचारे के साथ बातचीत के जरिए अपने मतभेद सुलझाएं.
आंतरिक एकजुटता और आर्थिक दबाव का सामना करने का संकल्प
देश की आंतरिक राजनीतिक स्थिति पर पेज़ेश्कियान ने कहा कि पश्चिमी देश ईरान में अंदरूनी फूट डालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान में देश में अभूतपूर्व एकजुटता है. उन्होंने सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई के साथ अपनी लंबी बैठकों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान अपने आंतरिक आर्थिक संतुलन को ठीक करने और जनता में निवेश करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
उन्होंने अमेरिका और इजरायल द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों की तुलना गाजा में इजरायल द्वारा भोजन-पानी रोकने की रणनीति से की और कहा कि जो लोग प्रतिबंधों के जरिए ईरान को झुकाने का भ्रम पाल बैठे हैं, उन्होंने बहुत भारी भूल की है.