ट्रंप टैरिफ का मुकाबला: केंद्र सरकार ने तैयार किया वैकल्पिक रास्ता
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क अब भारत के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं. इसे लेकर देश में चर्चाओं का दौर जारी है. लेकिन इस बीच एक अच्छी खबर यह है कि भारत सरकार ने अमेरिका शुल्क का मुकाबला करने के लिए पहले से ही एक नया रास्ता तैयार कर लिया है.
सरकार ने एक विशेष ब्लू-प्रिंट बनाया है ताकि भारतीय व्यापार को किसी भी तरह का नुकसान न हो.
भारत की नीति इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट है. यदि अमेरिका भारत पर शुल्क का बोझ बढ़ाता है, तो भारत सबसे पहले वैकल्पिक रास्तों की तलाश करेगा. विशेष रूप से कुछ उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिनमें वस्त्र, आभूषण और रत्न उद्योग शामिल हैं. इन तीनों क्षेत्रों पर अमेरिका के शुल्क का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है.
अब तक इन तीन उद्योगों का अमेरिका में काफी निर्यात होता था, जिससे अच्छा मुनाफा भी मिलता था. लेकिन अब भारत इनके लिए वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहा है ताकि भारतीय व्यापारियों को किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े.
इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 40 देशों को वैकल्पिक बाजार के रूप में चुना है, जहां भारत आसानी से अपना व्यापार बढ़ा सकता है.
इन देशों की सूची में इंग्लैंड, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली, नीदरलैंड, मैक्सिको, पोलैंड, रूस और तुर्की शामिल हैं. इसके अलावा बेल्जियम, कनाडा, अरब और ऑस्ट्रेलिया भी भारत के निशाने पर हैं.
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि यदि भारत इन 40 देशों में सही तरीके से योजना बनाकर काम करे, तो इससे भारत का मुनाफा बढ़ेगा. इन देशों में भारत के इन तीन उत्पादों की मांग काफी ज्यादा है, इसलिए इन बाजारों को हासिल करने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी.
फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्धन अग्रवाल ने कहा कि अगले कुछ महीनों में भारत जिस रास्ते पर व्यापार करेगा, उस पर देश की अर्थव्यवस्था का विकास काफी हद तक निर्भर करेगा.
उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी आने वाले दिनों में इस मामले में एक बड़ी भूमिका निभाएगा. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अधिक शुल्क देना पड़े, भारत अमेरिका को इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगा. इसका कारण यह है कि भारत-अमेरिका संबंधों पर नकारात्मक रुख का दोनों देशों के रिश्तों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है.
कुल मिलाकर, भारत अमेरिका को नाराज किए बिना विश्व के अन्य देशों के साथ अपने व्यापार को और मजबूत करना चाहता है.
इसके लिए भारत को कुछ समय देना होगा. जहां भारत और अमेरिका के संबंध हमेशा अच्छे रहे हैं, वहीं अब भारत यह देख रहा है कि वह अमेरिका में अपने व्यापार को कैसे आगे बढ़ाए. इस पर विश्व की अन्य शक्तिशाली देशों की भी नजर बनी हुई है.