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दिल्ली पुलिस पर हिरासत में बर्बरता के आरोप: प्रदर्शनकारियों की बेरहमी से पिटाई

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12 अक्टू. 2026, 08:07 PM 4 मिनट में पढ़ें 2

 प्रदर्शनकारियों की बेरहमी से पिटाई
प्रदर्शनकारियों की बेरहमी से पिटाई

नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले तीन दिनों (10, 11 और 12 अक्टूबर) के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न तथा अत्यधिक बल प्रयोग के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं. पुलिस हिरासत से छूटे लोगों के अनुसार, दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और नाबालिगों के साथ वैन और पुलिस कैंपों के भीतर योजनाबद्ध तरीके से बर्बरता की गई.


जंतर-मंतर और कनाट प्लेस पर विरोध के बाद बड़े पैमाने पर धरपकड़


सोमवार, 12 अक्टूबर को नौजवान भारत सभा, रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (आरडब्ल्यूपीआई) और दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन जैसे युवा संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बाराखंभा रोड पर अचानक फ्लैश मॉब रैली निकाली. ये कार्यकर्ता जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में विज्ञापित करने यानी 'डी-नोटीफाई' किए जाने का कड़ा विरोध कर रहे थे. पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग के पास रोककर हिरासत में ले लिया.


इससे पहले 11 अक्टूबर को कनाट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आह्वान पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था. इस दौरान भी भारी संख्या में छात्रों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. राजघाट से लेकर कनाट प्लेस तक पिछले 72 घंटों में हजारों प्रदर्शनकारियों को पुलिस वैनों में भरकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में बने डिटेंशन सेंटरों में भेजा गया.


महिला कार्यकर्ताओं ने सुनाया आपबीती का खौफनाक मंजर


हिरासत में ली गई महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप लगाए हैं. आरडब्ल्यूपीआई के सदस्य विशाल के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को जेल जैसी वैन में ठूंस दिया गया, जहां उन्हें पीटा गया और महिला कार्यकर्ताओं का गला दबाकर उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया.


आरडब्ल्यूपीआई की एक अन्य सदस्य निशू ने बताया कि भीषण गर्मी और घुटन के कारण जब कई लोग वैन के अंदर बेहोश होने लगे, तब भी पुलिसकर्मियों ने पीने के लिए पानी तक नहीं दिया. निशू ने अपने शरीर पर पड़े चोटों और नीले निशानों को दिखाते हुए कहा कि वैन में पानी की बोतलें मौजूद होने के बावजूद चिल्लाने और गिड़गिड़ाने पर भी पुलिस का दिल नहीं पसीजा.


दिशा संगठन की कार्यकर्ता आरन्या को 10 और 11 अक्टूबर दोनों दिन निशाना बनाया गया. प्रत्यक्षदर्शियों और साथी कार्यकर्ताओं के अनुसार, 11 अक्टूबर को कनाट प्लेस से हिरासत में लिए जाने के बाद आरन्या को चलती वैन के अंदर अलग ले जाकर जमीन पर लिटाया गया और पुलिसकर्मियों ने उसका गला घोंटने की कोशिश की. विरोध करने पर अन्य कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन छीन लिए गए और वीडियो न बनाने की धमकियां दी गईं.


सुनसान कैंपों में व्यवस्थित तरीके से की गई पिटाई


पांडवालन कलां स्थित एक सामुदायिक केंद्र और एलआईसी बिल्डिंग के पास बने अस्थायी पुलिस कैंपों में ले जाए गए प्रदर्शनकारियों ने पुलिसिया कार्रवाई को एक सुनियोजित हिंसा करार दिया है. प्रदर्शनकारी अर्जुन उन्नीकृष्णन ने बताया कि जनता और मीडिया की नजरों से दूर रखने के लिए उन्हें सुनसान पुलिस कैंप में ले जाया गया, जहां सबागों को एक पंक्ति में बैठाकर पहले उनके मोबाइल फोन जब्त किए गए.


अर्जुन के मुताबिक, मोबाइल से वीडियो फुटेज डिलीट करने के बाद पुलिस अधिकारियों ने लोगों को थप्पड़, घूंसे और उनके संवेदनशील अंगों पर वार किए. इस दौरान सात से आठ कंपार्टमेंट वाली गाड़ियों में प्रति सेक्शन 10-10 लोगों को ठूंस दिया गया था, जिनमें चार नाबालिग भी शामिल थे.


पत्रकारों की आंखों देखी: एक-एक कर की गई पिटाई


इस पूरी घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे पर्यावरण पत्रकार और लेखक एम. राजशेखर ने पुलिस के रवैये को "अत्यधिक व्यवस्थित" बताया. राजशेखर, जिन्हें एक पत्रकार होने के नाते सीधे तौर पर निशाना नहीं बनाया गया, ने बताया कि 'कॉन्विक्ट-वैन' के अंदर हर व्यक्ति की पिटाई के लिए तीन-तीन पुलिसकर्मी बारी-बारी से 30-30 सेकंड का समय ले रहे थे.


उन्होंने बताया कि मुख्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया और उनके फोन छीन लिए गए. देर रात रिहा होने के बाद फोन न होने के कारण कई युवाओं को अपने घर लौटने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इस पूरी घटना ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के हिरासत संबंधी दिशा-निर्देशों और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP